आह गुलज़ार देहलवी ! जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़िबह होती है

Anand Mohan Zutshi Gulzar Dehlvi

मशहूर शायर गुलज़ार देहलवी को ख़िराज-ए-अक़ीदत मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़ टूटा  है  आस्माँ से कोई  हसीन  तारा ऐ सोज़ अंजुमन में अब सोग की फ़िजा है उर्दू का इक मुजाहिद, हाँ वो अज़ीम शायर गुलज़ार देहलवी भी दुनिया से चल बसा है (सोज़ ) उर्दू के अज़ीम इंक़लाबी शायर, गंगा-जमुनी तहज़ीब के अमीन और पासदार,