क्‍या वास्तव में महिलाएं उस समाज में सुरक्षित हैं जहां हम महिलाओं को सशक्‍त कहते हैं? सवाल करती है फिल्‍म ‘नानू कुसुमा’

पूछती है फिल्‍म ‘नानू कुसुमा’ : क्या हमने महात्मा गांधीजी की रामराज्य का सपना पूरा कर लिया है जहां बचाव और सुरक्षा सम्मिलित हैं? नानू कुसुमा हमारे पितृसत्तात्मक समाज की वास्तविकता को दर्शाती है

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जानिए मैं पितृसत्ता के खिलाफ क्यों हूं?

Why am I against patriarchy? मैं पितृसत्ता के खिलाफ हूं – एक हजारों सालों की स्मृतियां, लोक छवियां – दासता, वंचना, अस्पृश्यता, विद्रोह, पराजय, दमन,

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