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Tag Archives: पितृसत्ता

50 लाख साल की बूढ़ी मनुष्यता की कुल उपलब्धि हिंसा, घृणा और पितृसत्ता है?

पितृसत्ता रहेगी, नफरत और मार्केट की सियासत की शिकार स्त्री होगी, जाति के नाम सामूहिक बलात्कार होंगे, तो फूलनदेवी भी होगी पलाश विश्वास अन्याय और अत्याचार की दुःखद परिणति यही है। जाति हिंसा किसी महायुद्ध से कम नहीं है। अंध जातिवाद से पीड़ित मनुष्यता का प्रत्युत्तर भी हिंसा है। यह होती रहेगी। इसका अंत नहीं, क्रमबद्ध है यह। आजादी के …

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पितृसत्ता और राजनीति का गठजोड़

HATHRAS हाथरस गैंगरेप : व्यवस्था और मानवता का अंतिम संस्कार

Patriarchy and politics nexus 2012 में निर्भया के साथ हुए दुष्कर्म के बाद जिस तरह जनता ने सड़कों पर आकर विरोध प्रकट किया और फिर रेप कानून की भी बनाया गया और आगे अपराधियों को सजा दिलवाने और पीड़िता को न्याय दिलवाने के लिए निर्भया फंड बनाया गया तो ऐसा लगा कि अब इस तरह की वारदातें आगे नहीं होंगी, …

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ऐसा नहीं है कि असहिष्णुता सिर्फ सवर्णों की होती है, बाबासाहेब जैसे अद्भुत विद्वान राजनेता के अनुयायी भी कम असहिष्णु नहीं

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

वरिष्ठ पत्रकार पलाश विश्वास का यह आलेख हस्तक्षेप पर मूलतः April 19, 2016 को प्रकाशित हुआ था। पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन हम दीपा कर्मकार की उपलब्धियों (achievements of Deepa Karmakar) पर लिख नहीं रहे हैं। इस बारे में अगर आपकी दिलचस्पी है तो मीडिया के सौजन्य से आपको काफी कुछ जानकारी अब तक मिली होगी, जिसे हम दोहराना नहीं चाहते। …

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