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Tag Archives: पुस्तक समीक्षा

देहलीला से देहगान तक की सच्ची अभिव्यक्ति : अन्या से अनन्या

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प्रभा खेतान की आत्महत्या अन्या से अनन्या : पुस्तक समीक्षा तकरीबन एक महीने पहले अन्या से अनन्या पढ़ी और आज जाकर कुछ लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। एमए के दौरान इस आत्मकथा को पढ़ाने वाले प्रोफेसर से पहला प्रश्न मेरा यही था कि ऐसी औरत को पढ़ेंगे अब हम ? ऐसी औरत का मतलब मेरा सीधा सीधा वही था …

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दूबधान : समय और समाज का हलफनामा

Doobdhan

उषा किरण खान का कथा संग्रह ‘‘दूबधान’’ : पुस्तक समीक्षा उषा किरण खान अपनी कहानियों के लिए जानी जाती हैं। गांँव की हसीन भंगिमाएं, इनकी कहानी की पहचान है। ‘‘दूबधान’’की 24 कहानियाँ समय और समाज की सच्चाई का हलफ़नामा हैं, तो दूसरी ओर कहानियाँ, नई जमाने को हैरान भी करती हैं। क्यों कि, कहानी की सभी महिलाएं गाँव की पुरानी …

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पुस्तक समीक्षा : महफ़िल लूटना चाहते हैं तो मुक्तक रट लीजिए

Main Aisa Vaisa nahin hoon

मुक्तक क्या है हिंदी साहित्य में व्यवस्थित रूप से मुक्तकों को लिखने की परंपरा का विकास रीतिकाल में हुआ। इस दौर में कबीरदास, रहीम तथा मीरा बाई ने कई मुक्तक अथवा छंद लिखे। कविता का वह संक्षिप्त रूप जो दोहा अथवा मुक्तक शैली या विधा में लिखा जाए उसे मुक्तक कहा जाता है। कबीर आदि के बाद वर्तमान में यह …

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लापता पैर : विमर्शों, कल्पनाओं और यथार्थ के मिश्रण से उपजी कहानियाँ

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पुस्तक समीक्षा | Book review हिंदी कथा साहित्य में हिंदी कहानी का आरंभ माधवराव स्प्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ से आरम्भ हुआ माना जाता है। यह कहानी सन् 1901 में प्रकाशित हुई थी। हिंदी की पहली कहानी को लेकर हालांकि अलग-अलग विद्वानों का अलग-अलग मन्तव्य है। हिंदी कहानियों के क्रम में लघु कथा की अगर बात करें तो …

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प्रश्न पानी से नहीं धुलते : नए विमर्श पैदा करती कहानियां

लेखक - दिलीप कुमार शर्मा अज्ञात किताब - प्रश्न पानी से नहीं धुलते किताब प्रकार- कहानी संग्रह प्रकाशन - अधिकरण प्रकाशन 2019

Stories creating new discourses सन 1803 में इंशा अल्लाह खान कृत कहानी “रानी केतकी की कहानी” को हिंदी की पहली कहानी (First story of hindi) कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे इस कला में परिवर्तन होने लगा और कहानियां एक नया आयाम स्थापित करने लगीं। अकहानी, सचेतन कहानी, नई कहानी, साठोत्तरी कहानी आदि जैसे कई बदलाव इस विधा में हमें …

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शिमला डायरी : पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश

Shimla diary Book by Pramod Ranjan

‘शिमला डायरी’ (Shimla diary) अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता (Hindi journalism) की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल (journalist Pramod Kaunswal) ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत …

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अदिति गुलेरी और उनकी कविताएं : बात सिर्फ बचपन की नहीं परिवार की भी है….

Dr. Aditi Guleri's first poetry collection, डा. अदिति गुलेरी का प्रथम काव्य संग्रह बात वजूद की

अदिति गुलेरी और उनकी कविताएं : बात सिर्फ बचपन की नहीं परिवार की भी है…. हाल ही में हिमाचल प्रदेश धर्मशाला से सुप्रसिद्ध परिवार की होनहार बिटिया डा. अदिति गुलेरी का प्रथम काव्य संग्रह ‘बात वजूद की‘ मेरे पास आया जिसे स्वयं अदिति ने भेजा और प्रतिक्रिया की उम्मीद भी रखी। किसी भी लेखक की यह मंशा हमेशा रहती है …

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