एक पत्रिका के पृष्ठों पर बोलते साहित्य जगत पर दृष्टिपात

आलोचना के आलोचकों का काम पोलेमिक्स की दिशा पर नजर रखने का होता है। डॉ. शर्मा की पोलेमिक्स में किसी सर्वकालिक सत्य की तरह काम कर रहे मार्क्सवाद ने उन्हें अपने प्रकार से हमेशा भारत की जनता की क्रांति की समस्याओं से जोड़े रखा और यही एक बात उन्हें अन्य सभी से अलगाती है।