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Tag Archives: प्रकृति

नवजात शिशुओं के लिए क्या बनी रहेगी यह पृथ्वी, यह प्रकृति?

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

Will this earth, this nature remain for newborns? शिवन्ना के साथ हम अफ्रीका के जंगल की सैर कर आये लॉक डाउन हुआ तो क्या, कोरोना है तो क्या? हमारे खेतों में पूरी दुनिया, सारा ब्रह्माण्ड है। जिसे देखने के लिए शिबन्ना जैसे बच्चों की आंखें चाहिए। हम तो लगातार प्रकृति से दूर दृष्टिहीन बनते जा रहे हैं। जब से प्रेरणा …

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मानव आस्तित्व के लिए आवश्यक जैव-विविधता संरक्षण

World Biodiversity Day in Hindi

22 May 2021 : Feature on World Biodiversity Day in Hindi | International Biodiversity Day Article in Hindi. विश्व जैव विविधता दिवस हर वर्ष 22 मई को मनाया जाता है। विश्व जैव विविधता दिवस का उद्देश्य लोगों को जैव विविधता के बारे में जागरूक करना है । नई दिल्ली, 22 मई: मानव और प्रकृति के बीच एक महत्वपूर्ण और स्थायी …

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मर रही है पृथ्वी, आखिर तक बचे रहेंगे गांव?

Nature And Us

मर रही है पृथ्वी, बचे रहेंगे गांव। गांव को ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत नहीं है इस पृथ्वी को हमने गैस चैंबर बना दिया है। प्रकृति पर अत्याचार, प्राकृतिक संसाधनों का निर्मम दोहन, अनियंत्रित कार्बन उत्सर्जन (Uncontrolled carbon emissions), खेती किसानी का सत्यानाश, जंगलों की अंधाधुंध कटाई, नदियों की हत्या, जलस्रोतों और समुंदर से लेकर अंतरिक्ष तक का सैन्यीकरण- सर्वोपरि हरियाली …

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Greta Thunberg Toolkit Case : सवाल दिशा और उजाले का है

Today's Deshbandhu editorial

दिशा रवि पर मुकदमा | Greta Thunberg Toolkit Case | देशबन्धु में संपादकीय आज  जो इंसान प्रकृति को बचाने की लड़ाई लड़ता है, जो पर्यावरण से प्यार करता है, क्या वह मानवता से नफरत कर सकता है? यह सवाल पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी (Arrest of 22-year-old Environmental activist Disha Ravi) के बाद जेहन में उठता है। Farmers toolkit …

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जेलीफिश की बढ़ती आबादी से संकट में सार्डिन मछलियाँ (सारडाइन)

Jellyfish

Sardine fishes in crisis due to the increasing population of jellyfish Wildlife and marine life threat नई दिल्ली, 16 फरवरी, 2021 : प्रकृति में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु पाए जाते हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के अनुरूप विकसित हुए हैं। लेकिन मनुष्य ने अपने विकास के क्रम में न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ा है बल्कि वन्य जीवों और समुद्री …

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प्रकृति और हम : आओ! थोड़ा बसंत हो जाएं …

Nature And Us

माघ अलविदा हो चला है। मौसम का मिजाज फागुनी हो चला है। जवान ठंड अब बूढ़ी हो गई है। हल्की पछुवा की गलन सुबह – शाम जिस्म में चुभन और सिहरन पैदा करती है। गुनगुनी धूप थोड़ा तीखी हो गई है। घास पर पड़ी मोतियों सरीखी ओस की बूँदें सूर्य की किरणों से जल्द सिमटने लगी हैं। प्रकृति के इस …

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सिकुड़ती प्रकृति, वन्यजीव एवं पक्षियों की दुनिया

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World of shrinking nature, wildlife and birds मनुष्य इस दुनिया का एक हिस्सा है या उसका स्वामी? वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है क्योंकि मनुष्य के कार्य-व्यवहार से ऐसा मालूम होने लगा है, जैसे इस धरती पर जितना अधिकार उसका है, उतना किसी और का नहीं है- न वृक्षों का, न पशुओं का, न पक्षियों …

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सच में अनोखा है ‘जीव जंतुओं का अनोखा संसार’

Jeev Jantuon ka Anokha Sansar

Review of Book “Jeev Jantuon ka Anokha Sansar” जीव जंतुओं का अनोखा संसार की पुस्तक समीक्षा जीव-जंतुओं की विचित्र दुनिया बच्चों और बड़ों के लिए सदा से कौतूहल भरी रही है। इसी कौतूहल और ज्ञान को बढ़ाने में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल ने हाल ही में एक अनोखी कृति की रचना की है, जिसका नाम भी उन्होंने ‘जीव जंतुओं …

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मादा पेंगुइन : मातृत्व का एक भावपूर्ण उदाहरण

Bird world

The female penguin: a soulful example of motherhood जानिए पक्षियों की अद्भुत दुनिया के बारे में संसार में पक्षियों की दुनिया (Bird world) अद्भुत है जो ये बताती है कि प्रकृति को अपनी अन्य संतानों से उतना ही प्यार-दुलार है, जितना कि मनुष्य से। हाँ, मनुष्य ज्येष्ठ अवश्य है, इस वजह से उसकी यह जिम्मेदारी भी बनती है कि सभी …

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