लॉकडाउन क्यों गलत नीति है – स्वीडिश महामारीविद् व चिंतक जोहान गिसेके की टिप्पणी

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स्वीडिश महामारीविद् व  चिंतक जोहान गिसेके की टिप्पणी “एक अदृश्य वैश्विक महामारी” The invisible pandemic by Johan Giesecke in Hindi Why lockdowns are the wrong policy – Swedish expert Prof. Johan Giesecke [स्वीडन के महान महामारीविद् व  चिंतक जोहान गिसेके (Johan Giesecke Coronavirus) और उनके सहयोगी एंडर्स टेगनेल कोरोना-विजय के अप्रतिम नायक के रूप में

कोविड-19 : कथित कांस्पीरेसी थ्योरी किसके खिलाफ है?

Demonstrations in Germany protesting against restrictions imposed in COVID's name

समाज कर्मी मेधा पाटकर ने पिछले दिनों जर्मनी में  कोविड के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों (Demonstrations in Germany protesting against restrictions imposed in COVID‘s name) को ‘प्रेरणादायक खबर’ (inspirational news) बताया, जिस पर राजनीति-शास्त्री जानकी श्रीनिवासन (Political scientist Janaki Srinivasan) ने उन्हें याद दिलाया कि “यह प्रदर्शन  दक्षिणपंथियों द्वारा

शिमला डायरी : पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश

Shimla diary Book by Pramod Ranjan

‘शिमला डायरी’ (Shimla diary) अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता (Hindi journalism) की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल (journalist Pramod Kaunswal) ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की

जर्मन बुद्धिजीवियों ने पसंद किया प्रमोद रंजन का हस्तक्षेप पर प्रकाशित लेख

Pramod ranjan प्रमोद रंजन की दिलचस्पी सबाल्टर्न अध्ययन, आधुनिकता के विकास और ज्ञान के दर्शन में रही है। ‘साहित्येतिहास का बहुजन पक्ष’, ‘बहुजन साहित्य की प्रस्तावना’ और ‘शिमला-डायरी’ उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। उनके द्वारा संपादित दक्षिण भारत के सामाजिक-क्रांतिकारी ईवी रामासामी पेरियार के प्रतिनिधि विचारों पर केंद्रित तीन पुस्तकों का प्रकाशन हाल ही में हुआ है। रंजन इन दिनों असम विश्वविद्यालय के रवींद्रनाथ टैगोर स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चरल स्टडीज में प्राध्यापक हैं।

German intellectuals appreciate Pramod Ranjan’s article published on Hastakshep हस्तक्षेप में प्रकाशित प्रमोद रंजन के लेख “कोविड 19, विज्ञान और बुद्धिजीवियों की ज़िम्मेदारी” का जर्मन अनुवाद  “रूबिकॉन” ने प्रकाशित किया है। (यहां देखें) रूबिकॉन एक प्रतिष्ठित वेबपोर्टल है, जो पिछले कुछ वर्षों में जर्मनी में सत्ता प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक मुखर बौद्धिक-दार्शनिक आवाज के रूप में उभरा