Home » Tag Archives: प्रेमचंद और भारतीय समाज

Tag Archives: प्रेमचंद और भारतीय समाज

‘प्रेमचंद की परंपरा’ पर फातिहा न पढ़ें : महाकरुणा के नहीं संघर्ष के लेखक थे प्रेमचंद

munshi premchand

जब-जब प्रेमचंद की चर्चा शुरू होती है तब तब प्रेमचंद को उनके वैचारिक व रचनात्मक सरोकारों से मुक्त कर ‘प्रेमचंद की परम्परा’ के नाम पर अमूर्त बहस छेड़ दी जाती है. अमूमन इस बहस के दो छोर होते हैं. एक छोर पर इस परंपरा में प्रेमचंद के पूर्ववर्तियों से लेकर सभी समकालीनों को शामिल करने की उदारता बरती जाती है …

Read More »

यदि प्रेमचंद आज भारत के प्रधानमंत्री होते !

jagdishwar chaturvedi

प्रेमचंद जयंती पर जरूरी सवाल | Important questions on Premchand Jayanti आज साहित्य से लेकर जीवन तक सारवान भौतिक तत्व घट रहा है। साहित्यकार निर्मित बहसें, निर्मित यथार्थ और निर्मित प्रशंसा में मगन हैं। इनमें कहीं पर भी सबस्टेंस नहीं नजर आ रहा। जो लेखक भूमंडलीकरण पर बहस कर रहे हैं, वे भूमंडलीकरण का क-ख-ग तक नहीं जानते। जो बाजारवाद …

Read More »

प्रेमचन्द का पाठ वस्तुतः गरीब, दरिद्र और वंचितों का पाठ है

Munshi premchand

प्रेमचंद और आलोचना की चुनौतियाँ -1 | Premchand and the challenges of criticism-1 इस समय आलोचना जिस संकट में है उसमें नए –पुराने दोनों ही किस्म के समालोचकों के पास जाने की जरूरत है। आलोचना के संकटग्रस्त होने की अवस्था में पुराने आलोचक और सिद्धांत ज्यादा मदद करते हैं। हिन्दी में नया संकट दो स्तर पर है। पहला संकट यथार्थबोध के …

Read More »