प्रेमचन्द का संसार एक गरीब का घर-संसार था, उन्हें ‘घृणा का प्रचारक’ ‘कलम घसीटू मुन्शी’ और क्या-क्या नहीं कहा गया

Munshi premchand

प्रेमचन्द का संसार एक गरीब का घर-संसार था। कलम को उन्होंने अपना फावड़ा समझा था और उसी की आमदनी पर वे मुनहसिर थे। किसी राजघराने की टुक्कड़खोरी पर कदापि नहीं।