प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस पर तेलुगू में बनी बायोपिक का 53वें इफ्फी में प्रदर्शन

युवा, प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे कम उम्र के शहीदों में से एक खुदीराम बोस पर तेलुगू में बनी एक बायोपिक 53वें इफ्फी के इंडियन पैनोरमा खंड (53rd IFFI by INDIAN PANORAMA) के तहत प्रदर्शित की गई।

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क्‍या वास्तव में महिलाएं उस समाज में सुरक्षित हैं जहां हम महिलाओं को सशक्‍त कहते हैं? सवाल करती है फिल्‍म ‘नानू कुसुमा’

पूछती है फिल्‍म ‘नानू कुसुमा’ : क्या हमने महात्मा गांधीजी की रामराज्य का सपना पूरा कर लिया है जहां बचाव और सुरक्षा सम्मिलित हैं? नानू कुसुमा हमारे पितृसत्तात्मक समाज की वास्तविकता को दर्शाती है

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‘आटा साटा’ : सिनेमा की हत्या किसने की?

‘आटा साटा’ : राजस्थान के प्रेमचंद कहे जाने वाले चरणसिंह पथिक की लिखी इस अच्छी – भली कहानी की हत्या सिनेमा के रूप में किसने की है?

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गहरे अवसाद में ले जाती ‘मट्टू की साइकिल’ अब देश भर में चल रही

वैसे क्या कारण है कि इतने साल गुज़र गए पर प्रेमचंद के गोदान का होरी अब भी मट्टू की साइकिल के रूप में ज़िंदा है।  इस फिल्म को देखने के बाद यह विचार जरूर कीजिएगा।

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चंबल की छवि खराब करने को फिल्मकारों ने अंग्रेजों के विमर्श को अपनाया

के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल चंबल में आके तो देखो सांस्कृतिक हलचल का केन्द्र बना फिल्म समारोह इटावा : विश्व सिनेमा को मुगले आजम

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कमाठीपुरा बाज़ार में खड़ी ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’

Gangubai Kathiawadi Review in Hindi | गंगूबाई काठियावाड़ी समीक्षा हिंदी में ‘कहते हैं कमाठीपुरा में कभी अमावस की रात नहीं होती।’ यह संवाद सुनते हुए

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इंसानी मन की दमित इच्छाओं का ‘आखेट’

‘आखेट’ फ़िल्म समीक्षा | ‘Aakhet’ film review फ़िल्म के पटकथा लेखक, निर्देशक रवि बुले यूँ तो पेशे से फ़िल्म समीक्षक है लेकिन पहली बार ‘आखेट’

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