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Tag Archives: भूमंडलीकरण

जयशंकर प्रसाद, भूमंडलीकरण और राष्ट्रवाद

jaishankar prasad, globalization and nationalism

Jaishankar Prasad, Globalization and Nationalism समय – फ्रांसिस फुकुयामा ने´इतिहास का अंत´ की जब बात कही थी तो उन्होंने ´एंड ऑफ दि स्पेस´ की बात कही थी, लेकिन हिंदी आलोचकों ने उसे गलत अर्थ में व्याख्यायित किया। सवाल यह है भूमंडलीकरण के कारण सारी दुनिया में ´स्पेस´का अंत हुआ या नहीं ॽ यही वह परिदृश्य है जिसमें आप भूमंडलीकरण को …

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इंजी. लल्लन कुमार : बिहार की दलित राजनीति की एक नई संभावना !

Eng. Lalan Kumar MLA BJP

Engineer Lalan Kumar: A new possibility for Bihar’s Dalit politics! जिस बिहार विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं, उसका परिणाम सामने आ चुका है. इस चुनाव के शुरू होने के पहले जो महागठबंधन दूर – दूर तक मुकाबले में नहीं था : चुनाव प्रचार शुरू होने के कुछ दिन बाद तेजस्वी यादव के ऐतिहासिक प्रयास से न …

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मितरों ! विकास से सावधान

Nitish Kumar Bihar CM

Wary of development विकास के नाम पर वोट करने के पहले सोचें! इन पंक्तियों के लिखे जाने के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के तीसरे और अंतिम चरण का चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक खास अपील कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाने के साथ ही चुनाव …

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सांस्कृतिक सृजनकार काल की पुकार! – मंजुल भारद्वाज

Manjul Bhardwaj

12 अगस्त थिएटर ऑफ़ रेलेवंस सूत्रपात दिवस ! देश और दुनिया आज सांस्कृतिक रसातल में है. तकनीक के बल पर संचार माध्यम में सारा विश्व लाइव है त्रासद यह है की तकनीक लाइव है आदमी मरा हुआ है. मरी हुए दुनिया को तकनीकी संचार लाइव कर रहा है. कमाल का विकास है व्यक्ति,परिवार,समाज, देश और दुनिया मरे हुए और तकनीक …

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नई शिक्षा नीति और नई चुनौतियां : अब किसी लॉर्ड क्लाइव की जरूरत नहीं

narendra modi flute

नई शिक्षा नीति और नई चुनौतियां : अब किसी लॉर्ड क्लाइव की जरूरत नहीं है, सारे सिराजुद्दौला भी मीर जाफर बन गए हैं New education policy and new challenges: No Lord Clive is needed anymore, all Siraj-ud-daulas have also become Mir Jafar ज्ञान, शिक्षा और वर्चस्व (भाग 1) | New education policy and new challenges “हर ऐतिहासिक युग में शासक …

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डाइवर्सिटी से ही भारत के आदिवासी बन सकते हैं समृद्ध और आधुनिक!

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

Only by diversity, the tribals of India can become rich and modern! आज विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World’s Indigenous Peoples) है. इस अवसर का इस्तेमाल आदिवासियों को अधिकार चेतना से समृद्ध और आधुनिक जीवन शैली की ओर उन्मुख करने में होना चाहिए. जहाँ तक भारत का सवाल है, इस दिशा में नहीं के बराबर काम हुआ. इसलिए …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस बार ममता किरण का, “जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता”

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता नई दिल्ली, 30 जुलाई 2020. हस्तक्षेप ड़ॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्य अनुभाग “साहित्यिक कलरव” में इस रविवार में सुप्रसिद्ध गज़ल़गो एवं …

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ममता किरण की गजलों में ममता व आत्‍मीयता का निवास है

Inauguration of Ghazal collection "Aangan Ka Shajar" by poetess Mamta Kiran

‘आंगन का शजर‘ हुआ लोकार्पित ममता किरण ने डिजिटल लोकार्पण गोष्‍ठी में अपनी ग़ज़लों से समां बाँधा। Inauguration of Ghazal collection “Aangan Ka Shajar” by poetess Mamta Kiran नई दिल्‍ली, 30 जुलाई। ‘जश्‍नेहिंद’ दिल्ली के तत्‍वावधान में एक डिजिटल गोष्‍ठी में सुपरिचित ग़ज़लगो एवं कवयित्री ममता किरण के ग़ज़ल संग्रह ”आंगन का शजर” का लोकार्पण संपन्‍न हुआ। गोष्‍ठी की शुरुआत ‘जश्‍नेहिंद’ …

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कविता से जुड़े मित्रों को शैलेन्द्र शैली का यह आखरी लेख बार बार पढ़ना चाहिए

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

कल [24/7/2020] शैलेन्द्र शैली का जन्म दिन (Shailendra Shaily birthday) था। अपनी मृत्यु [6 सितम्बर 2001] से पहले उन्होंने जो अंतिम साहित्यिक लेख लिखा था वह यही है। उनकी पहचान एक श्रेष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में इतनी बड़ी है कि उनके साहित्यकार की पहचान दब गयी। यह बात प्रस्तुत लेख के कथ्य और उसकी भाषा से स्पष्ट हो रही …

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जो राजनीति और रंगमंच के अन्तर्सम्बन्ध को नहीं जानता वो ‘रंगकर्मी’ नहीं !

Manjul Bhardwaj

रंगमंच और राजनीति : Theater and Politics मूलतः रंगमंच एक राजनैतिक कर्म है जो राजनीति और रंगमंच के अन्तर्सम्बन्ध को नहीं जानता वो ‘रंगकर्मी’ नहीं है! आज का समय ऐसा है, आज का दौर ऐसा है आज विपदा का दौर है, संकट का दौर है, महामारी का दौर है, या भारत के संदर्भ में कहूं तो एक ऐसा दौर है …

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डॉ. अम्बेडकर का श्रमिक वर्ग को राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी का सन्देश

Dr B.R. Ambedkar

Dr. Ambedkar’s message of sharing political power in the working class बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर न केवल महान कानूनविद, प्रख्यात समाज शास्त्री एवं अर्थशास्त्री ही थे वरन वे दलित वर्ग के साथ-साथ श्रमिक वर्ग के भी उद्धारक थे। बाबा साहब स्वयं एक मजदूर नेता भी थे। अनेक सालों तक वे मजदूरों की बस्ती में रहे थे। इसलिये उन्हें …

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इस मजदूर दिवस पर जानें झारखंड के एक ‘प्रतिबंधित’ मजदूर यूनियन के बारे में

कामरेड सत्यनारायण भट्टाचार्य उर्फ सत्तो दा, Comrade Satyanarayan Bhattacharya alias Satto da

Learn about a ‘banned’ labor union of Jharkhand on this Labor Day Capitalism is moving towards its destruction all over the world अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस (International Labor Day) हमें प्रत्येक वर्ष याद दिलाता है कि किस तरह से मजदूरों ने अपने अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष किया और अपने प्राणों तक की आहुति दी। आज जो हमें 8 घंटे …

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“इंडियाज़ डॉटर-सेक्स, वोईलेंस और वुमेन : बाज़ार का सबसे ज्यादा बिकाऊ माल” 

india's daughter documentary review

“India’s Daughter-Sex, Violence and Women: Market’s Most Selling Merchandise” India’s daughter documentary review in Hindi अरगला पत्रिका के संपादक और जनवादी कवि अनिल पुष्कर कवीन्द्र का यह लेख 08 मार्च 2015 को हस्तक्षेप पर प्रकाशित हुआ था, पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन  दरअसल ये बाज़ार उन मुल्कों में अपनी घुसपैठ कर चुके हैं जहां तमाम तरह की पारम्परिक बंदिशें, रिवाज, समाज …

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अजीब प्रधानमंत्री हैं, मार-काट की ही भाषा बोलते हैं, खामियाजा देश भुगतता है

Ish Mishra on Lock down

Weird is the Prime Minister, he speaks the language of violence, the country suffers brunt दुष्यंत कुमार का एक शेर है, मत कहो आकाश में कुहरा घना है यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है। इस मुल्क में मध्यवर्ग का ऐसा कुत्सित अंधभक्त तबका पैदा हो गया है जो सरकार की हर सही-गलत नीति-काम का महिमामंडन ही राष्ट्र सेवा मानता है …

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भारतीय सिनेमा वाया स्त्री विमर्श : अभिव्यक्ति के खतरे

Bollywood news, Upcoming movies, Exclusive Report, Entertainment news in english

Women in Indian Cinema | strong female characters in indian cinema | patriarchy in indian cinema | stereotypes in indian cinema | girl power movies hindi भारतीय सिनेमा में स्त्री विमर्श | हिंदी सिनेमा में स्त्री विमर्श का स्वरूप तेजस पूनिया हिंदी साहित्य के महान साहित्यकार आचार्य महावीर प्रसाद का कहना है- “साहित्य समाज का दर्पण है।” यक़ीनन साहित्य समाज …

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कोरोना वायरस पर अमेरिकी अफवाहों से सावधान : 2009 में अमेरिका में एच1एन1 फ्लू के प्रकोप से दुनिया भर में 3 लाख लोग मारे गए थे

corona virus live update

कहां से आ रही हैं चीन के खिलाफ अफवाहें? Pietar Navarro, chairman of the US National Trade Committee, called China a disease incubator इधर के दिनों में न्यूयार्क टाइम्स ने लेख जारी कर अमेरिकी राष्ट्रीय व्यापार कमेटी के अध्यक्ष पीर्टर नवारो ने चीन को रोग इनक्यूबेटर बताया। 2009 में अमेरिका में एच1एन1 फ्लू का प्रकोप (H1N1 flu outbreak in America) …

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क्या “आप” आरएसएस का उत्तर भारत में भाजपा का वैकल्पिक राजनैतिक प्रयोग है?

Arvind Kejriwal

Is “AAP” an alternative political experiment of RSS in North India? जब मोदी के विकास जुमले की लहर पूरे देश में चल रही थी तब भी दिल्ली में “आप” की जीत हुई थी. आज जब मोदी का बहुमत की भीड़ से संसद में संविधान के मूल स्तम्भों को धराशायी करने का षड्यंत्र उफ़ान पर है तब भी दिल्ली में “आप” …

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बैंक कर्मचारी व अधिकारी भी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में

Nationwide bank strike

रांची, 31 जनवरी 2020. संसद का बजट सत्र (Budget Session of Parliament) आज से प्रारंभ हो चुका है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्णकालिक बजट कल यानी कि 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जरिए सदन के पटल पर आर्थिक सर्वे पेश किया जा चुका है। बजट सत्र की शुरुआत …

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दलित मीडिया के उत्थान का एकमेव उपाय : विज्ञापन बाज़ार में डाइवर्सिटी

Dr B.R. Ambedkar

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा सम्पादित –प्रकाशित मूकनायक के सौ वर्ष होने के अवसर पर विशेष लेख Special article on the occasion of hundred years of Mooknayak edited and published by Baba Saheb Dr. Bhimrao Ambedkar The only way to uplift Dalit media: Diversity in the advertising market आगामी 31 जनवरी को दलित पत्रकारिता के सौ साल पूरे (100 …

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