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Tag Archives: मतुआ आंदोलन

बंगाल से बाहर आरक्षण के लिए अस्पृश्यता का सामाजिक इतिहास अनिवार्य है, बंगाल के भगवा दलितों के लिए नहीं

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

मुश्किल यह है कि निरंकुश भगवा तंत्र गरीबों, वंचितों और आदिवासियों, स्त्रियों की भावनाओं को बहुत जल्द भड़काने में है। इनकी जीवन यंत्रणा, इनकी पीड़ा, इनकी समस्याओं, इनकी सामाजिक स्थिति, इनकी पहचान के इतिहास की चर्चा किये बिना अस्पृश्यता, अत्याचार, उत्पीड़न के हवाले से असमानता और अन्याय की आपबीती, शोध से तंत्र फौरन सक्रिय होकर उन्हीं को उनकी पहचान तथा …

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मेरा जन्मदिन कुलीन वर्ग के लिए एक दुर्घटना ही है

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

एक बड़े सच का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि मार्टिन जान को मेरी याद तो है लेकिन पलाश विश्वास को वे पहचान नहीं पा रहे। दरअसल उत्तराखंड और झारखंड में लोग मुझे पलाश नाम से ही जानते रहे हैं, किसी विश्वास को वे नहीं जानते, क्योंकि राजकिशोर संपादित परिवर्तन में नियमित लिखने से पहले तक मैं पलाश नाम से …

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बांग्लादेश में अल्पसंख्यक उत्पीड़न पर मोदीजी ने क्या शेख हसीना से कोई बात की?

Narendra Modi Addressing the nation from the Red Fort

Did Modiji talk to Sheikh Hasina on minority oppression in Bangladesh? मोदी जी की बांग्लादेश यात्रा के निहितार्थ ढाका के अखबारों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश में दो सौ साल पहले हुए दलित नवजागरण मतुआ आंदोलन के मुख्यालय जाने को प्रमुखता से कवर किया जाता है। बंगाल और बाकी देश में इस ऐतिहासिक किसान विद्रोह और दलित …

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