‘अनहद’ का गांधी विशेषांक : सत्ता के नैतिक विमर्श में हमेशा बने रहेंगे गांधी

सिनेमा, पत्रकारिता, साहित्य आदि अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं में गांधी और आजादी की लड़ाई के वक्त के अन्य बड़े नायकों के साथ गांधी के तुलनात्मक अध्ययन जैसे नाना विषयों पर भी कई लेख इस अंक में शामिल किये गए हैं, जो इस अंक को बहुत मूल्यवान और संग्रहणीय बनाते हैं।

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भाषा और साहित्य पर महात्मा गांधी की दृष्टि

भगवान सिंह की ‘महात्मा गांधी का साहित्य और भाषा चिंतन’ : महात्मा गांधी के चिंतन में तुलसीदास. शिक्षा एवं भाषा के संबंध में गांधीजी के विचार. गांधी की राजनीति में सत्याग्रह, रामराज्य और चरखा का क्या महत्व है

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गांधी जी की ज़िद पर बना पहला स्वदेशी पेन

आइजन हावर से लेकर खुश्चेव के हाथों तक पहुंचा ‘रत्नम पेन’. देश के पहले स्वदेशी पेन रत्नम पेन की कहानी.

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गांधी की दांडी यात्रा : ‘नमक कर’ के विरोध का इतिहास और सत्याग्रह की भूमिका

ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य ही देश का आर्थिक दोहन और साम्राज्य की आर्थिक समृद्धि करना था। वे आए ही भारत में इस उद्देश्य थे। हम नमक कर के इतिहास पर एक चर्चा करते हैं।

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तूफान के पहले का सन्नाटा था गांधी की दांडी यात्रा के पहले

जानिए गांधी की दांडी यात्रा के पहले देश की स्थिति क्या थी? हर विचारधारा के निशाने पर थे गांधी. गांधी जी अहिंसा पर भी दृढ़ थे और ब्रिटिश राज के खिलाफ एक सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने पर भी। आलोचनानाओं, निंदा, संशय और आक्षेपों के बीच वे अडिग और विचलित बने रहे।

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सत्य अहिंसा और प्रेम के साथ बने रहेंगे गांधी

सरकारी संस्था ‘गांधी दर्शन एवं स्मृति’ की मासिक पत्रिका ‘अंतिम जन’ के सावरकर विशेषांक को लेकर कुछ गांधी-जन आक्रोश में हैं। साथ ही कुछ पत्रकारों,

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गांधी अब ओटीटी पर भी दिखने चाहिए : अजय ब्रम्हात्मज

एक दिवसीय वेबिनर में बोले फिल्म समीक्षक अजय अजय ब्रम्हात्मज, गांधी सिनेमा से कभी नहीं होंगे ख़ारिज़ महात्मा गांधी की 73वीं पुण्य तिथि पर जनसंचार

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