क्या मार्क्सवाद जिंदाबाद करने से ही काम चल जाएगा?

वामपंथी दोस्त क्रांति का बिगुल बजा रहे हैं और यह उनका हक है और उनको यह काम करना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे देश में लोकतंत्र संकट में है क्रांति नहीं।

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‘अनहद’ का गांधी विशेषांक : सत्ता के नैतिक विमर्श में हमेशा बने रहेंगे गांधी

सिनेमा, पत्रकारिता, साहित्य आदि अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं में गांधी और आजादी की लड़ाई के वक्त के अन्य बड़े नायकों के साथ गांधी के तुलनात्मक अध्ययन जैसे नाना विषयों पर भी कई लेख इस अंक में शामिल किये गए हैं, जो इस अंक को बहुत मूल्यवान और संग्रहणीय बनाते हैं।

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