पूछता है भारत – रिया को जमानत मिलने की खबर पिछले पृष्ठों पर कम जगह में क्यों छपी ?

TRP ke liye murgon ki ladai

आगामी बिहार विधानसभा के चुनावों को देखते हुए, भाजपा ने सुशांत सिंह के मामले को ‘आपदा में अवसर’ की तरह लपका व बिहार को छोड़ कर आये उस कलाकार को, बिहार का सपूत और शहीद बनाना चाहा जिसने बिहार के नाम पर ना तो शिव सेना की ज्याद्तियों का विरोध किया ना लाकडाउन में प्रवासी मजदूरों की वापिसी में मदद की

मीडिया संस्थानों के नाम खुला पत्र, आपदा में अवसर न तलाशें, पत्रकारों की सेलरी न मारें

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मीडिया संस्थान अपने सामाजिक दायित्वों में उपरोक्त मुद्दों को शामिल करते हुए अपने-अपने संस्थान के संपादकीय टीम एवं अन्य सेक्शन के कर्मचारियों के प्रति मानवीय संवेदना दिखाते हुए उचित निर्णय लेंगे।

संजय घोष मीडिया अवार्ड-2020 की घोषणा

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Announcement of Sanjay Ghosh Media Award-2020 नई दिल्ली 27 सितंबर 2020, दिल्ली स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन चरखा डेवलपमेंट कम्युनिकेशन नेटवर्क ने “संजय घोष मीडिया अवार्ड -2020” में आवेदन की घोषणा की है। यह उन लेखकों के लिए एक मंच प्रदान करेगा जो ग्रामीण महिलाओं की छिपी प्रतिभा को उजागर करने का साहस रखते हैं। कुल

अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें, वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है

Donald Trump

Compare your situation with the situation in America, what is happening there is happening exactly in India. अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें। वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है। सिर्फ मृतकों की संख्या वहां 81 हजार पार है। बेरोज़गार दस करोड़। हमारे यहां आंकड़े सच बोल

कहानी अधूरी छोड़कर जाने वाला नायक इरफान ख़ान

Irrfan Khan

The protagonist, leaving the story incomplete, Irrfan Khan “दुख सबको माँजता है / और चाहे स्वयं सबको मुक्ति देना वो न जाने / किन्तु जिनको माँजता है/ उन्हें ये सीख देता है कि सबको मुक्त रखे” – अज्ञेय नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2020. जैविक बीमारी कोरोना नें हमें हमारे दुख में भी अकेला कर दिया

जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया