इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ?

Ghar Se Door Bharat Ka Majdoor

What was the crime of these workers? (मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़) ——————————–   रेल की पटरी पर मज़दूरों की बिखरी लाशें इधर-उधर इन लाशों के, बिखरी है कुछ सूखी रोटी सुनो ग़ौर से कुछ कहती है ! …………………………….. इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ? जो केवल रोज़ी-रोटी की ख़ातिर अपने गाँव को छोड़ कर