संविधान और लोकतंत्र पर चल रहा है भाजपा का बुलडोजर : भाकपा (माले)

CPI ML

भाकपा (माले) ने अल्पसंख्यकों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कड़ी निंदा की

शर्मा-जिंदल को जेल भेजने और बुल्डोजर कार्रवाई फौरन रोकने की मांग की

लखनऊ, 13 जून 2022। भाकपा (माले) ने पैगम्बर मुहम्मद साहब पर नूपुर शर्मा-नवीन जिंदल की टिप्पणी (Nupur Sharma-Naveen Jindal’s comment on Prophet Muhammad) पर हो रहे विरोध के जवाब में रविवार को प्रयागराज, कानपुर व सहारनपुर में अल्पसंख्यकों को लक्ष्य कर बुलडोजर चलाने और बिना उचित न्यायिक प्रक्रिया के उनके घरों को बलपूर्वक ढहा देने की योगी सरकार की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है।

राज्य सचिव सुधाकर यादव ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि नफरत उगलने वाले जो नेता विवाद की जड़ में रहे हैं, सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है। देश भर में प्रतिवाद हो रहे हैं, मगर कई दिन बीत जाने के बावजूद शर्मा-जिंदल को गिरफ्तार नहीं किया गया है। वहीं कार्रवाई की मांग करने पर अल्पसंख्यक समुदाय के अगुवा लोगों जिन्होंने पूर्व में सीएए-विरोधी आंदोलन में भी भाग लिया, ऐसे व्यक्तियों को लक्ष्य कर उनके घरों पर बुल्डोजर चलवाये जा रहे हैं।

माले नेता ने जेएनयू की पूर्व छात्र नेता आफरीन फातिमा के प्रयागराज स्थित घर को बुल्डोजर से गिरा देने को गैरकानूनी व राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आफरीन के साथ एकजुटता व्यक्त की।

कामरेड सुधाकर ने कहा कि अवैध निर्माण की आड़ में समुदाय विशेष को लक्षित करना और महज मुकदमे में आरोपित होने के आधार पर सीधे बुल्डोजर चला देना साम्प्रदायिक फासीवादी व तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई है। यदि कानून के राज के प्रति जरा भी सम्मान शेष है, तो भाजपा सरकार को फौरन ऐसी कार्रवाइयों को विराम देना चाहिए और शर्मा-जिंदल को अविलंब जेल भेजना चाहिए।

रोकना होगा इस बुल्डोजर राज को (This bulldozer raj has to be stopped)

माले नेता ने कहा कि भाजपा का बुलडोजर अल्पसंख्यकों के घरों पर ही नहीं, संविधान और लोकतंत्र पर चल रहा है। इस बुल्डोजर राज को रोकना होगा। लोकतंत्र में विश्वास करने वाली सभी शक्तियों को एकजुट होकर आगे आना होगा और विरोध की आवाज बुलंद करनी होगी।

Web title : BJP’s bulldozer is running on constitution and democracy: CPI(ML)

वर्चुअल रोजगार संवाद : युवाओं ने योगी सरकार के दावों की खोली पोल

yogi rozgar do

वर्चुअल रोजगार संवाद : युवाओं ने योगी सरकार के दावों की खोली पोल

#यूपीबेरोजगारदिवस 5 बजे तक रिकॉर्ड दस लाख ट्वीट, ट्विटर पर छाया रहा रोजगार का मुद्दा

प्रयागराज समेत प्रदेशभर में युवा मंच ने किया सांकेतिक प्रदर्शन

Virtual employment dialogue: youth exposed the claims of Yogi government

प्रयागराज, 5 जून 2021, युवा मंच समेत संगठनों के संयुक्त आवाहन पर आयोजित यूपी बेरोजगार दिवस जबरदस्त सफल रहा। प्रयागराज समेत प्रदेश भर में युवा मंच के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने सांकेतिक प्रदर्शन कर योगी सरकार को आगाह किया, कि अगर रोजगार के सवाल को हल नहीं किया गया, तो प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जायेगा और विधानसभा चुनाव में रोजगार पर योगी सरकार की वादाखिलाफी को मुद्दा बनाया जायेगा।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा और रणनीति बनाने के लिए युवा मंच द्वारा आयोजित वर्चुअल रोजगार संवाद में युवाओं ने योगी सरकार के रोजगार देने के दावों की पोल खोली।

वर्चुअल रोजगार संवाद में अपनी बात रखते हुए युवा मंच संयोजक राजेश सचान ने कहा कि प्रदेश में रोजगार की भयावह स्थिति है, पिछली सरकार तक की भर्तियां अधर में हैं, तमाम विभागों में 50-70 फीसद या इससे भी अधिक पद रिक्त पड़े हुए हैं। रोजगार को सरकार चाहें जो प्रोपैगैंडा करे लेकिन हालात ऐसे हैं कि मनरेगा और दिहाड़ी मजदूरी भी जरुरतमंदों को नहीं मिल रही।

युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह ने वर्चुअल रोजगार संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि अगर रोजगार के प्रश्न हल नहीं किया गया तो युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने शिक्षा विभाग से लेकर तमाम विभागों में लाखों पदों को ही खत्म कर दिया और जो अभी भी 5 लाख से ज्यादा रिक्त पद हैं उन्हें भरने की सरकार की कोई योजना नहीं है।

181 वुमन हेल्पलाइन की रेनू शर्मा और खुशबू ने अपनी पीड़ा को बताते हुए कहा जहां एक तरफ योगी सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं, लेकिन उन्होंने वुमन हेल्पलाइन की महिलाओं के रोजगार छीनने का काम किया और महीनों का बकाया वेतन का भुगतान तक नहीं किया गया।

युवा मंच वाराणसी के संयोजक दिव्यांशु राय ने निजी स्कूलों के शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोरोना काल में शिक्षकों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्हें किसी तरह की कानूनी सुरक्षा नहीं है। शिक्षक भुखमरी के कगार पर हैं लेकिन सरकार इन निजी शिक्षकों के लिए किसी तरह की मदद नहीं कर रही है।

पीलीभीत से यूपीएसएसएससी के छात्रों के प्रतिनिधि अभिषेक अवस्थी ने कहा कि अकेले यूपीएसएसएससी में 22 भर्तियां लंबित हैं जिसमें 2016 और 2018 में विज्ञापित जेई भर्ती भी है जिसकी न तो परीक्षा हुई और ही सिलैबस जारी किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में आयोग में 50 हजार पदों का अधियाचन भी आ गया लेकिन अब पीईटी परीक्षा के नाम पर रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी करने से रोक लग गई।

चंदौली से आलोक राय ने ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं की बेकारी के सवाल को प्रमुखता से रखा। उन्होंने किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी और काले कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए जारी किसानों के आंदोलन का समर्थन किया।

एक्स रे टेक्नीशियन के छात्रों के प्रतिनिधि सुहैल हसन ने विस्तार से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की गई। ज्यादातर लोगों को संविदा पर रखा जा रहा है और तनख्वाह आधी कर दी गयी है। एक्स रे टेक्नीशियन के रिक्त पदों को 2016 के बाद से ही भरा नहीं गया जबकि 556 पदों के लिए अधियाचन भी आयोग को प्राप्त होने के बावजूद विज्ञापन जारी किया गया।

सहारनपुर जिला संयोजक राजीव त्यागी ने कहा कि भाजपा सरकार में कथनी और करनी में अंतर है, कहने के लिए भाजपा डिजिटल युग की वकालत करती है लेकिन पाठ्यक्रम में विषय शामिल होने के दो दशकों से कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई।

युवा मंच के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य इंजी. राम बहादुर पटेल ने बताया कि तकनीकी संवर्ग में आईटीआई, डिप्लोमा से लेकर बीटेक तक के लिए तकनीकी शिक्षण संस्थानों व विभागों में 70% से ज्यादा रिक्त पद हैं लेकिन इन्हें भरा नहीं जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बिजली विभाग में तकनीशियन के 4102 का जो विज्ञापन आया था उसे भी योगी सरकार ने बिना कोई कारण रद्द कर दिया।

आजमगढ़ से जयप्रकाश यादव ने कोरोना की वजह से आयु में छूट देने और छात्रों को लॉकडॉन अवधि का किराया माफ करने की बात उठाई।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक अंधाधुंध निजीकरण पर रोक नहीं लगती रोजगार नहीं मिल सकता।

अमरेंद्र सिंह ने कहा कि आवाज उठाने पर मुकदमे दर्ज किया जा रहा है, जेल भेज दिया जाता है। योगी सरकार तानाशाही पर आमादा है।

वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने इसके कुछ समाधान देते हुए कहा कि रोजगार सृजन के लिए सरकार की कोई नीति नहीं है। अगर सरकार कारपोरेट घरानों पर 2% भी संपत्ति व उत्तराधिकार कर लगा दे तो रोजगार की गारंटी की जा सकती है।

अंत में ईशान गोयल ने संकल्प प्रस्तावों को पढ़ा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। जिसमें प्रमुख तौर पर रोजगार के मुद्दे को विधानसभा चुनाव का मुद्दा और राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाने, रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी करने व हरहाल में लंबित भर्तियों को पूरा करने, काले कृषि कानूनों को रद्द करने और काले कानूनों में जेल भेजे गए राजनीतिक कार्यकर्ताओं की रिहाई व देशद्रोह आदि काले कानूनों को खत्म करने के लिए आंदोलन चलाने का संकल्प लिया गया। वर्चुअल रोजगार संवाद में लखनऊ विवि के छात्र नेता सतेन्द्र प्रताप यादव, पीलीभीत से आलोक रंजन, लखनऊ से कुलदीप निषाद, संत कबीर नगर से वागीश धर राय, बस्ती से शैलेंद्र त्रिपाठी, लखनऊ से आशीष चौधरी, प्रतापगढ़ से नरेन्द्र मिश्रा, शाहजहांपुर से रवि जीत आदि प्रतिनिधियों ने भी हिस्सेदारी की। संचालन कुलदीप कुमार ने किया।

ट्विटर अभियान में संगीता पाल, लवकुश पटेल, मनोज पटेल, संदीप वर्मा समेत प्रदेश भर में युवा मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में दी गई है।

20 दिन, 443 किलोमीटर : जारी है कांग्रेस की नदी अधिकार पदयात्रा

nadi adhikar yatra नदी अधिकार यात्रा

लखनऊ, 21 मार्च 2021. कांग्रेस की नदी अधिकार पदयात्रा 20 दिन से जारी है। यह यात्रा अब तक 443 किलोमीटर की यात्रा कर चुकी है। नदी अधिकार यात्रा के 20वें दिन पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट के जरिए समझते हैं, क्या है ये यात्रा, क्या है इसका इतिहास और क्या है इसका राजनीतिक महत्व …

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रयागराज के यमुना के किनारे बसवार गांव में बीती 4 फरवरी को निषाद समुदाय के ऊपर पुलिसिया उत्पीड़न हुआ। कथित अवैध खनन के नाम पर पुलिस ने निषादों की 18 नाव को क्षतिग्रस्त कर दिया था। पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और बच्चों के ऊपर भयानक लाठीचार्ज किया। सिर्फ इतना ही नहीं गांव के सैकड़ों लोगों के ऊपर पुलिस ने कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर बर्बर कार्यवाही की थी।

यह खबर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को मौनी अमावस्या के दिन उनकी नाव चलाने वाले नाविक ने दी।

महासचिव प्रियंका गांधी को खबर मिलने के बाद 48 घंटे नहीं बीते कि वे बसवार पहुंच गईं। बसवार जाने के बाद महासचिव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। यमुना के धूल भरे कछार में ढाई किलोमीटर पैदल चलकर नाव देखने गयीं।

कांग्रेस महासचिव प्रयागराज से दिल्ली रवाना होतीं, उससे पहले ही अपने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि निषाद समाज की मांगों को लेकर वे पदयात्रा निकालें। यूपी कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग ने 1 मार्च से बसवार गांव से नदी अधिकार यात्रा को निकाला जोकि अब 20 वें दिन बलिया जिले में पहुंची। यात्रा ने अब तक 443 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की है।

नदी अधिकार यात्रा में लगे कांग्रेसजन हर दिन लगभग 7 से 10 निषाद बाहुल्य गांवों में सघन जनसंपर्क करती हैं।

महासचिव प्रियंका ने कहा गांव-गांव से उठ रही है आवाज़ निषाद समुदाय को उनका हक मिले

महासचिव प्रियंका गांधी ने नदी अधिकार यात्रा पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि यूपी कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग विभाग की नदी अधिकार यात्रा 19 दिन से 418 किमी चलकर निषाद समाज के बीच जाकर उनके हक की आवाज उठा रही है। निषाद नदियों के राजा और रक्षक हैं। नदी, नालों, तालाब, झील के संसाधनों पर उनका नैसर्गिक हक है।

उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि निषाद समाज के गांव-गांव से एक ही आवाज उठ रही है कि उनकी सुख-दुख की साथी नदियों के संसाधनों बालू, मछली, नदी किनारे की जमीन इत्यादि के इस्तेमाल को बड़े पूजीपतियों-ठेकेदारों के चंगुल से निकालकर निषादों को इनके उपयोग का हक मिलना चाहिए।

यूपी की प्रभारी महासचिव प्रियंका गाँधी ने कहा कि ये उनकी जीविका का सवाल है और हम निषाद समाज की जीविका के हक को दिलाने की लड़ाई पूरी प्रतिबद्धता से लड़ेंगे।

उन्होंने ट्वीट के अंत में कहा लिखा है कि यात्रा की अगुवाई कर रहे देवेंद्र निषाद, कुंवर निषाद (विधायक) वंदना निषाद व यात्रा में शामिल सभी साथियों का मैं दिल से धन्यवाद करती हूँ।

23 फरवरी को महासचिव प्रियंका गांधी ने बसवार से पीड़ितों से मिलकर जाने के बाद पीड़ित परिवारों को 10 लाख रुपये की संयुक्त मदद की घोषणा की, साथ ही साथ निषाद समाज के परंपरागत अधिकारों की मांग की। कुछ दिनों बाद प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने 18 पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद करने बसवार पहुंचे।

नदी अधिकार यात्रा की प्रमुख मांगे, गांव-गांव बंट रहा है पर्चा

नदी अधिकार पदयात्रा में गांव गांव में पर्चे बांटे जा रहे हैं। अब तक 2 लाख पर्चे निषाद बाहुल्य गांवों में बांटे जा चुके हैं।

पर्चे में लिखा है कि नदी अधिकार यात्रा के जरिये कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि

1-नदियों पर निषादों के पारम्परिक अधिकार को सुनिश्चित किया जाय।

2- एनजीटी की गाइडलाइंस का हवाला देकर यूपी सरकार द्वारा नदियों में नाव द्वारा बालू खनन पर लगी रोक को हटाया जाय।

3-नदियों से बालू निकालने के पारम्परिक अधिकार को सुनिश्चित किया जाय।

4-बालू खनन से माफिया राज खत्म किया जाय।

5- मशीन द्वारा होने वाले बालू खनन पर रोक लगाई जाय।

6-नदियों के किनारे खेती के पारम्परिक अधिकार को सुनिश्चित किया जाय।

7-नदियों में मछली मारने का निर्बाध अधिकार दिया जाय।

8- निषाद समाज पर पुलिसिया उत्पीड़न बन्द हो, निर्दोष लोगों के ऊपर से मुकदमें वापस ले सरकार।

9- बसवार की बर्बर घटना की न्यायिक जांच हो और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही हो।

बसवार गांव के पीड़ित परिवार निषाद बाहुल्य गांवों में जाकर बता रहे हैं अपना दर्द

गोद में चार महीने का बच्चा, सर पर पल्लू रखीं 35 साल की वंदना निषाद अपने संबोधन में अक्सर भावुक हो जाती हैं। वे रोकर लोगों के बीच में कहती हैं कि मेरे गांव की महिलाओं ने पुलिसकर्मियों के पैर पकड़ लिए थे। बहुत गिड़गिड़ाते हुए कहा था कि साहब रोजी रोटी चलती है नाव से हमारी, मत तोड़िये लेकिन पुलिस ने नहीं सुना। नावें तोड़ डालीं। गांव में लाठीचार्ज किया। शिकारी कुत्ते छोड़ें। अब कुछ बाकी नहीं योगी सरकार ने सब तबाह कर दिया है। लेकिन अब निषाद समाज अत्यचार नहीं सहेगा।

बसवार से बलिया तक नहीं, पूरे प्रदेश में निषाद समाज एकजुट हो रहा है

इस यात्रा की अगुवाई कांग्रेस के प्रदेश सचिव देवेंद्र निषाद कर रहे हैं। 20 दिन से लगातार चल रहे देवेंद्र निषाद की तबियत खराब है। लेकिन उनके हौसले कम नहीं हैं। वे कहते हैं कि यह बसवार से बलिया तक की यात्रा नहीं है। इस यात्रा के जरिये निषाद समाज पूरे प्रदेश में एकजुट हो रहा है। वे आगे कहते हैं कि निषाद जाति सबसे बड़ी अतिपिछड़ी जाति है लेकिन सपा, बसपा और भाजपा समेत सबने हमें ठगा है। भाजपा ने निषाद समाज को ठगने के लिए कई दुकानें खोली हैं लेकिन अब समाज जाग चुका है।

सामाजिक न्याय : कतार के आखिरी आदमी की लड़ाई है मजबूती से लड़ेगी कांग्रेस

यूपी कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग के प्रदेश अध्यक्ष के पैरों में कई पट्टियां लगीं हैं। छाले अब फूट गए हैं। लोगों को जगह जगह संबोधित करते हुए मनोज यादव कहते हैं कि कांग्रेस की प्रतिबद्धता कतार के आखिरी आदमी के लिए हैं। यह सामाजिक न्याय और इंसाफ की लड़ाई है। इसे पार्टी मजबूती के साथ लड़ेगी।

नदी अधिकार कानून बनाकर देंगे निषाद समाज का हक़

कांग्रेस महासचिव मक़सूद खान और विश्वविजय सिंह कहते हैं कि निषाद समाज को उनका हक मिलना चाहिए। कांग्रेस ने अन्य राज्यों में निषाद समाज के लिए कई हितकारी योजनाएं चलाईं हैं। यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो नदियों पर निषादों का हक़ कायम होगा।

हर गांव में यात्रा का स्वागत, महिलाएं एक गांव से दूसरे गांव तक कर रहीं हैं विदा

इस यात्रा में सबसे अधिक भागीदारी महिलाओं की रही है। महिलाएं हर गांव में यात्रा का स्वागत कर रहीं हैं। कांग्रेसजनों को दाना-पानी करा रही हैं। साथ ही साथ अपने गांव से दूसरे गांव तक यात्रा को विदा कर रहीं हैं।

1 मार्च से शुरू हुई यह यात्रा बसवार से चली है और बलिया के माझी घाट पर खत्म होगी। यह यात्रा करीब 500 किलोमीटर पैदल चली है। कुछ दुर्गम्य स्थलों पर नाव से भी सफर तय किया है। इस यात्रा में छत्तीसगढ़ के विधायक कुँवर सिंह निषाद लगातार चल रहे हैं।

निषाद गांवों में रात्रि विश्राम भी, सांस्कृतिक कार्यक्रम से जागरूकता

रात्रि में यात्रा निषाद गांवों में गंगा के किनारे रुकती है। अबतक 19 पड़ाव पूरे हो चुके हैं। निषाद गांवों में भोजपुरी बिरहा के जरिये बसवार गांव की घटना और भाजपा के जनविरोधी नीतियों को लोकगायक बता रहे हैं।

योगीराज में प्रयागराज : कश्मीरी फेरीवालों से प्रशासन कर रहा सौतेला व्यवहार – कांग्रेस

Shahnawaz Alam Yogi Adityanath

Prayagraj in Yogiraj: administering half-hearted treatment to Kashmiri hawkers – Congress

न वापस लौटने का पास दे रहा न अनाज दे रहा प्रशासन- शाहनवाज़ आलम

Administration is not giving return pass nor is giving grain – Shahnawaz Alam

लखनऊ, 9 मई 2020। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग ने प्रयागराज प्रशासन पर  कश्मीरी फेरीवालों को अपने प्रदेश लौटने के लिए पास नहीं आवंटित करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा है कि शहर में फंसे 78 कश्मीरी पिछले एक महीने में कई बार डीएम, एडीएम से मिलकर वापस जाने के लिए पास की मांग कर चुके हैं लेकिन प्रशासन टाल मटोल कर रहा है। यहां तक कि फेरी करके शॉल बेचने आए इन लोगों ने अपने पैसे से 3 बसों की भी व्यवस्था कर ली है, लेकिन सभी आवश्यक दस्तावेज़ होने के बावजूद प्रयाग राज प्रशासन उन्हें पास नहीं दे रहा है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि जब यूपी में फंसे दूसरे राज्यों के लोगों को अपने राज्य वापस जाने के लिए आसानी से पास दिया जा रहा है तो कश्मीरियों के साथ सौतेला व्यवहार करके सरकार क्य सन्देश देना चाहती है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि उनसे बातचीत में इन कश्मीरी लोगों ने यह भी बताया है कि केंद्र सरकार द्वारा दूसरे राज्यों में फंसे कश्मीरियों के लिए जारी हेल्पलाइन नम्बरों पर भी बात करने का कोई फायदा इन्हें नहीं हुआ है। वहीं कई बार प्रयागराज प्रशासन से बात करने के बावजूद अनाज़ और खाने तक की कोई व्यवस्था नहीं हुई है।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि कश्मीर में इंटरनेट की सेवा बंद (Internet service stopped in Kashmir) होने के कारण ये लोग अपने परिजनों तक से कट गए हैं, ऊपर से योगी सरकार का रवैय्या इन्हें और दुखी करने वाला है। उन्होंने तत्काल इन्हें वापस कश्मीर जाने का पास जारी करने की मांग की है।