मोदी ने 20 साल बाद 21 वीं सदी का पहले ग्लोबल झूठ Y2K को क्यों याद किया, बताया रवीश ने

Why did Modi remember Y2K, the first global lie of 21st century after 20 years, Ravish Kumar told

Why did Modi remember Y2K, the first global lie of 21st century after 20 years, Ravish Kumar told नई दिल्ली, 13 मई 2020. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल 12 मई को चौथा लॉकडाउन लागू किए जाने की घोषणा करते हुए राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में Y2K को याद किया। एनडीटीवी के चर्चित एंकर और

रवीश बोले- पालघर के बारे में मैं नहीं चुप था, सांप्रदायिकों का गिरोह कुछ ज़्यादा सक्रिय था

Ravish Kumar

Ravish said – I was not silent about Palghar, the communal gang was more active नई दिल्ली, 20 अप्रैल 2020. एनडीटीवी के चर्चित एंकर और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता रवीश कुमार (Ravish Kumar, NDTV’s celebrated anchor and Magsaysay Award winner) ने महाराष्ट्र के पालघर में हुई मॉब लिंचिंग की घटना (Incident of mob lynching in Palghar,

अपने ही देश के आठ राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं 56” प्रधानमंत्री और गृहमंत्री

Ravish Kumar

नागरिकता क़ानून के पास होते ही गृहमंत्री अमित शाह को मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में दौरा करना पड़ा। क़ायदे से जहां से इस क़ानून की उत्पत्ति हुई है वहाँ जाकर लोगों को समझाना था मगर एक महीना हो गया गृहमंत्री असम या पूर्वोत्तर के किसी राज्य में नहीं जा सके हैं। अमित शाह दिल्ली के

भारत का मीडिया भारत के अर्जित लोकतंत्र का हत्यारा है – रवीश कुमार

Ravish Kumar

India’s media is the killer of India’s earned democracy – Ravish Kumar अमित मालवीय। बीजेपी के नैशनल इंफोर्मेशन एंड टेक्नॉलजी के प्रभारी हैं। प्रेस की कथित स्वतंत्रता का सम्मान करने वाले हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी की पार्टी के NIT सेल के प्रभारी इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई को लेकर अपने ट्विटर हैंडल पर

रवीश कुमार के भाषणों के प्रभाव में एक सोच — यह भारतीय मीडिया की एक अलग परिघटना है

Ravish Kumar

रवीश कुमार के भाषणों के प्रभाव में एक सोच — यह भारतीय मीडिया की एक अलग परिघटना है रवीश कुमार के भाषणों (Speeches of ravish kumar) को सुनना अच्छा लगता है। इसलिये नहीं कि वे विद्वतापूर्ण होते हैं ; सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के चमत्कृत करने वाले नये सुत्रीकरणों की झलक देते हैं। विद्वानों के शोधपूर्ण भाषण