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Tag Archives: राष्ट्र

जयशंकर प्रसाद, भूमंडलीकरण और राष्ट्रवाद

jaishankar prasad, globalization and nationalism

Jaishankar Prasad, Globalization and Nationalism समय – फ्रांसिस फुकुयामा ने´इतिहास का अंत´ की जब बात कही थी तो उन्होंने ´एंड ऑफ दि स्पेस´ की बात कही थी, लेकिन हिंदी आलोचकों ने उसे गलत अर्थ में व्याख्यायित किया। सवाल यह है भूमंडलीकरण के कारण सारी दुनिया में ´स्पेस´का अंत हुआ या नहीं ॽ यही वह परिदृश्य है जिसमें आप भूमंडलीकरण को …

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मोदी समावेशी विकास की बात और चर्चा क्यों नहीं करते हैं ?

Narendra Modi PM Kisan Samman Nidhi

समावेशी विकास, आर्थिक विकास और मानव संसाधन विकास का अंतर्संबंध Why does Modi not talk about inclusive development? जीवन, समाज, राष्ट्र और समूची दुनिया के लिए ‘विकास’ एक अत्यंत ही उपयोगी, महत्वपूर्णं एवं सार्थक शब्द है। विकास ही जीवन है, विकास ही प्रगति है, विकास ही उन्नति है, विकास ही उद्देश्य है, और विकास ही दुनिया का अंतिम लक्ष्य है। …

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हिंदी साहित्य का यह दुस्समय है हिंदी भाषा और साहित्य के सत्यानाश की भी राजनीति है

Kadambini and Nandan cease publication

हिंदी साहित्य का यह दुस्समय है। राजनीति, हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की है और हिंदी भाषा और साहित्य के सत्यानाश की भी राजनीति है। Hindi literary magazines have already closed हिंदी की साहित्यिक पत्रिकाएं पहले ही बंद कर दी गईं। लघु पत्रिकाएं किसी तरह निकल रही हैं अजब जिजीविषा और गज़ब प्रतिबद्धता के साथ, जिन्हें न सत्ता का समर्थन है …

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