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Tag Archives: लोकतंत्र

फरसे से किस लोकतंत्र को बचा रहे हैं हिन्दू हृदय सम्राट अखिलेश यादव?

akhilesh yadav farsa

ब्राह्मणों/सवर्णों के रेडिकलाइजेशन का जो काम भाजपा हिंदुत्व के बैनर तले अरसे से कर रही है उसे अखिलेश यादव ने भी स्वीकार कर लिया है. आज वह इसी राजनीति को और मजबूत कर रहे हैं. यह मूलतः लोकतंत्र को कमजोर करने की राजनीति है दरअसल, ब्राह्मणों के बीच महर्षि परशुराम जी को स्थापित करना उनका फरसा प्रदर्शन करना सब उसी …

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भाजपा कार्यकारिणी में मोदी : आसमाँ पै है खुदा और जमीं पै ये

badal saroj narendra modi

Modi in BJP executive: Asma pai hai khuda and zamin pai ye भाजपा कार्यकारिणी में गूँजा मोदी का अहम् ब्रह्मास्मि आलाप हर तीन महीने में होने वाली भाजपा कार्यकारिणी की बैठक (BJP executive meeting) दो वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद मात्र एक दिन के लिए हुयी और “तेरे नाम पै शुरू तेरे नाम पै ख़तम” भी हो गयी। बिना …

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सरकार लोकतंत्र का अपहरण करने की हद तक दमन पर उतारू : दीपंकर भट्टाचार्य

भाकपा (माले) का राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की हत्या के खिलाफ सामूहिक उपवास में बदला माले का तीन दिवसीय उ. प्र. राज्य सम्मेलन शुरू किसान आंदोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाने का कार्यभार इस दौर का हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए : दीपंकर भट्टाचार्य राज्य सम्मेलन पहले दिन लखीमपुर खीरी में हुई किसानों की …

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गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करना वक्त की जरूरत – डॉ पार्थ शाह

–          लोकनीति निर्माण में लोक को शामिल करना ही लोकतंत्र का मूल उद्देश्य –          सिस्टम का दृष्टिकोण लोक को सहभागी बनाने की बजाय लोक के लिये बाध्यकारी नीतियां बनाने तक सिमटा नई दिल्ली, 26 सितम्बर। थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के संस्थापक व डायरेक्टर डॉ पार्थ शाह (Dr Parth Shah, Founder and …

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तानाशाही के हाईवे पर लोकतंत्र की प्रतिरोध शिला

जन्मदिन मोदी का (birthday of modi) था, मना रही थी भाजपा (BJP) और पैसा फूँका जा रहा था उस सरकारी खजाने का जिसे 135 करोड़ जनता से वसूली करके, उसी जनता की जरूरतें पूरी करने के लिए भरा जाता है। झूठ के हुक्काम की 17 बनाम जनता के एलान की 27 सितम्बर | Resistance stone of democracy on the highway of …

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क्या अफगान संकट सुलझाने में भारत सक्रिय भूमिका निभाएगा !

अफगान संकट सुलझाने में भारत की भूमिका! | India’s role in solving the Afghan crisis! देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today लम्बे समय तक निर्वाचित सरकार के शासन के पश्चात अफगानिस्तान पर तालिबानियों का कब्जा होना एक बार फिर से दुनिया भर के लिए चिंता का सबब बन गया है। सारे देशों को मिलकर वहां तत्काल लोकतंत्र …

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वो ‘लोक’लाश थी, जिसे हम ढोते चले गए

वो एचमटी की घड़ियों के कलपुर्जों सा ही बिखरा था, वो तब का भारत था जो टूट कर पाक, हिन्द बना। असल में वो ‘लोक’लाश थी, जिसे हम ढोते चले गए।  वो एचमटी की घड़ियों के कलपुर्जों सा ही बिखरा था, वो तब का भारत था जो टूट कर पाक, हिन्द बना। असल में वो ‘लोक‘लाश थी, जिसे हम ढोते …

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क्या भारत में लोकतंत्र है? यदि हाँ, तो पेगासस जासूसी कांड की जांच अब अनिवार्य है

 Is there democracy in India? If yes, then investigation of Pegasus espionage is now mandatory. विदेशी अखबार द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट (Foreign newspapers The Guardian and The Washington Post) सहित भारतीय वेबसाइट, द वायर और 16 अन्य मीडिया संगठनों द्वारा एक ‘स्नूप लिस्ट‘ जारी की गयी, जिसमें बताया गया कई मानवाधिकार कार्यकर्ता, राजनेता, पत्रकार, न्यायाधीश और कई अन्य लोग …

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मीडिया पर हमला लोकतंत्र के लिए अशुभ – आइपीएफ

 Attack on media inauspicious for democracy – IPF मीडिया को आतंकित करने की निंदा लवखनऊ 23 जुलाई 2021, दैनिक भास्कर अखबार और भारत समाचार जैसे चैनल पर केन्द्र सरकार के इशारे पर इनकम टैक्स विभाग द्वारा की गई छापेमारी की कड़ी निंदा करते हुए आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने इसे लोकतंत्र के लिए अशुभ माना है। आज प्रेस को जारी …

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आपातकाल के बाद साहित्यिक पत्रिकाएं मेनीपुलेशन और प्रमोशन का अस्त्र बन गयीं

 अव्यवस्थित लोकतंत्र और साहित्यिक पत्रकारिता आजादी के बाद साहित्यिक पत्रकारिता का परिदृश्य- Scenario of Literary Journalism after Independence. आजादी के बाद का साहित्यिक पत्रकारिता का परिदृश्य तकरीबन इकसार रहा है। पहले भी पत्रिकाओं का प्रकाशन निजी पहल पर निर्भर करता था, आज भी यही दशा है। पहले भी साहित्यिक पत्रिकाएं निकलती और बंद होती थीं, यही सिलसिला आज भी जारी …

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लोकतंत्र का कुचलना बन्द करो : भाकपा

Communist Party of India CPI

एस्मा हटाओ, किसानों पर लगे मुकदमे वापस लो, मजदूरी या पगार दो, जहरीली शराब रोको तथा लोकतंत्र का कुचलना बन्द करो : भाकपा लखनऊ- 28 मई, 2021,  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि संविधान और लोकतांत्रिक प्राविधानों के तहत चुन कर सत्ता में आयी भाजपा सरकार ने प्रदेश में लोकतंत्र …

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आग लगने पर चले हैं कुआं खोदने योगी : माले

CPI ML

लखनऊ, 19 अप्रैल। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने ऑक्सीजन के अभाव में लखनऊ समेत प्रदेश में कोरोना मरीजों की हो रही मौतों (Death of corona patients in Lucknow, including in the state due to lack of oxygen) को देखते हुए मुख्यमंत्री द्वारा ऑक्सीजन प्लांट लगाने का आदेश (Order to set up oxygen plant) जारी करने पर कहा है कि …

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श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते !

media

“श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते। सहयोग के लिए सम्पादक के धन्यवाद सहित सादर।“ किसी स्वतंत्र पत्रकार के लिए उसके किसी आलेख पर यह जवाब अब आम हो चुका है। स्वतंत्र पत्रकार ही नहीं किसी न किसी संस्थान से जुड़े बहुत से पत्रकार भी कोरोना के दौरान अपनी नौकरी खोने के बाद अब उस दिन …

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लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है देश में असहमति के प्रति बढ़ती असहनशीलता

एल. एस. हरदेनिया। लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Growing intolerance towards disagreement in the country is a serious threat to democracy न सिर्फ देश का सर्वोच्च न्यायालय, अनेक उच्च न्यायालय, अनेक समाचार पत्र, संविधान एवं न्यायिक क्षेत्र के  अनेक विशेषज्ञ, और यहां तक कि दुनिया के विभिन्न देशों की मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) के प्रति प्रतिबद्ध संस्थाएं यह मानती हैं कि भारत में बोलने …

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जुगनुओं को कैद करता तानाशाह : यही है संघी-भाजपाई “राष्ट्रवाद” – जो शुरू से ही इतना ही फर्जी है

disha ravi

इस बार 21-22 वर्ष की दिशा रवि को बिना किसी तरीके की सुनवाई के सीधे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिशा पर देशद्रोह, राष्ट्र के खिलाफ बगावत और न जाने कैसे-कैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं, अभी और कुछ आरोप गढ़े जाएंगे। कारपोरेट नियंत्रित मोदी मीडिया उन्हें और भी नमक-मिर्च लगाकर दोहरायेगा और पेड़,पौधे, नदी, पहाड़, …

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पत्रकारों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए जेजेए का संघर्ष

Press Freedom

रांची से शाहनवाज हसन. झारखंड में पत्रकारों की सुरक्षा (Security of journalists in Jharkhand) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। रघुवर दास के कार्यकाल में झारखण्ड के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में पत्रकारों की हत्यायें एवं झूठे मुकदमों के बाद जेल भेजने की घटनाओं को तब विपक्षी दलों  चुनावी मुद्दा बनाते हुए इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करने …

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चारधाम ऑल वेदर रोड और गंगा एक्सप्रेस-वे

Glaciers

बहस इन पर भी हो नदियों के अविरल-निर्मल पक्ष की अनदेखी करते हुए उनकी लहरों पर व्यावसायिक सवारी के लिए जलमार्ग प्राधिकरण (Waterways Authority of India,)। पत्थरों के अवैध चुगान व रेत के खनन के खेल में मिल खुद शासन-प्रशासन के नुमाइंदे। बांध-सुरंग परियोजनाएं। गंगा की ज़मीन पर पटना की राजेन्द्र नगर परियोजना। लखनऊ में गोमती के सीने पर निर्माण। दिल्ली में …

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अस्तित्व बचाने की लड़ाई है किसान आंदोलन : रामेश्वर प्रसाद

Aipf Patna

Kisan movement is a fight to save existence: Rameshwar Prasad पटना से विशद कुमार. किसानों का यह आंदोलन सिर्फ कृषि कानूनों के खिलाफ ही नहीं, लोकतंत्र, संविधान और देश बचाने के साथ-साथ अस्तित्व बचाने का संघर्ष है। आपदा की घड़ी में मोदी सरकार ने देश के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को पूंजीपतियों के हाथों बेचना शुरू कर दिया। हद तो तब हो …

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रोम, मिस्र, यूनान सब मिट चुके, बचाना है भारत की हस्ती को तो बचाना होगा यहां की जनता और जनतंत्र को

Today's Deshbandhu editorial

देशबन्धु में संपादकीय आज : पटरी से उतरता गणतंत्र अपनी किताब मॉर्टल रिपब्लिक में एडवर्ड जे वाट्स ने रोमन गणराज्य के पतन के कारणों (Reasons for the fall of the Roman Republic) पर नए नजरिए से मंथन किया है। सरकारी संस्थाओं, संसदीय नियमों और राजनैतिक रिवाजों ने सदियों तक रोम को राजनैतिक और सैन्य रूप से सशक्त बनाया, लेकिन जब …

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द इनइक्वैलिटी वायरस रिपोर्ट : असमानता के इस वायरस का वेक्सीन कब बनेगा? कोरोना काल में वायरस की तरह फैली गरीबी

Lockdown, migration and environment

A new Oxfam report Oxfam shows how socioeconomic inequalities rose during the pandemic, where the richest section’s wealth grew exponentially while most Indians reeled from destitution and hunger. द इनइक्वैलिटी वायरस रिपोर्ट : भारत का लोकतंत्र (Democracy of india) अपने गणतंत्र दिवस (The Republic Day) के अवसर पर एक इतिहास का हिस्सा बन रहा है जब देश का गण अपने …

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इन कृषि कानूनों पर क्या कैबिनेट में भी पर्याप्त विचार विमर्श हुआ था ?

Modi government is Adani, Ambani's servant. Farmers and workers will uproot it - Randhir Singh Suman

Was there enough discussion on these agricultural laws in the cabinet too? – Vijay Shankar Singh अब जब नौ दौर की बातचीत के बाद भी वार्ताकार मंत्रीगण, किसानों को यह नहीं समझा पा रहे हैं कि यह कानून कैसे किसानों के हित में बना है, तो इससे यह बात भी स्पष्ट होती है कि, या तो मंत्रीगण खुद ही यह …

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