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Tag Archives: वामपंथ

हिंदी में नेपाल विमर्श : भारत में नेपाल को कैसे समझें?

book review

प्रस्तावना : एक स्वयं भू कवि की नेपाल डायरी दर्शन मानिस को भित्री आँखा हो’.[1] अर्थात दर्शन मनुष्य की भीतरी आँख है.                     (जीवन रोका मगर, थबांग, रोल्पा, नेपाल) भईया मैं दर्शन नहीं जानती, पर आप पीएच.डी क्यूँ कर रहे हो?                     (निर्मला घीसिंग, सामना परिवार, नेपाल)[2] (१) यह कहावत आम है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है. पर …

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किसान आंदोलन : जो पानी बह गया उसे फिर से छुआ नहीं जा सकता

Chhattisgarh Kisan protest 26 November 2020. Farmers protest against agricultural laws on November 26. देशव्यापी किसान आंदोलन में जगह-जगह किसानों के प्रदर्शन

Arun Maheshwari on Prabhat Patnaik’s article on Farmer’s unity कल के टेलिग्राफ में प्रभात पटनायक का एक लेख है — A Promethian moment ( The farmer’s agitation challenges theoretical wisdom)। बंधन से मुक्ति का क्षण ; किसानों के आंदोलन ने सैद्धांतिक बुद्धिमत्ता को ललकारा है। जाहिर है, यह किसान आंदोलन और उसके एक महत्वपूर्ण सबक पर लिखा गया लेख है। …

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हमारी आजादी का 75वां साल : जानिए भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कम्युनिस्टों का योगदान

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वामपंथियों का इतिहास. कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास, भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास, डॉ अशोक धवले केंद्रीय सचिवमंडल सदस्य सीपीएम, अध्यक्ष अखिल भारतीय किसान सभा का संबोधन 75th year of our Independence भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कम्युनिस्टों का युगांतरकारी योगदान डॉ अशोक धवले केंद्रीय सचिवमंडल सदस्य सीपीएम, अध्यक्ष अखिल भारतीय किसान सभा का संबोधन Communist’s epoch-making contribution to India’s freedom …

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बंगाल में भाजपा के आक्रमण को रोकना बंगाल के अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है, क्या वामपंथ इसे समझेगा ?

CPIM

Stopping the BJP’s invasion of Bengal is a fight for the survival of Bengal, will the Left understand this? बंगाल, बंगालीपन और वामपंथ (2) भाजपा की आक्रामकता ने बंगाल की दुखती रगों को फिर एक बार छेड़ दिया है इसी 19 फरवरी को विश्वभारती विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह (Convocation of Visva-Bharati University) था, जिसमें प्रधानमंत्री ने आनलाईन अपना वक्तव्य रखा। …

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बंगालियत और वामपंथ : क्या वामपंथ फिर ऐतिहासिक भूल करने जा रहा है ?

CPIM

बंगालियत और वामपंथ : संदर्भ बंगाल चुनाव बंगाल का आगामी विधानसभा चुनाव (Upcoming assembly elections in Bengal) अब भी एक टेढ़ी खीर ही बना हुआ है। हमारी नजर में इसकी सबसे बड़ी वजह है — बंगाल और वामपंथ के साथ उसके संबंधों का सच। बंगाल का वामपंथ बांग्ला रैनेसांस की एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया के ऐतिहासिक उत्तरण की तरह है। …

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सत्याग्रह से सत्याग्रह तक : 2020 की तीन तस्वीरें

Happy New Year 2021

From Satyagraha to Satyagraha: Three pictures of 2020 Happy New Year 2021 गुजरे साल, 2020 की विरासत (Legacy of 2020) को बहुत हद तक सिर्फ तीन छवियों में पकड़ा जा सकता है। इनमें पहली छवि तो, जिससे यह साल शुरू हुआ था, शाहीन बाग (Shaheen bagh) में दिन-रात के धरने पर बैठी, महिलाओं की ही थी। नागरिकता संशोधन कानून- Citizenship …

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वामपंथ का काम अब ऑफिस केंद्रित हो गया है, लोहिया के प्रयोग का पतन अंततोगत्वा जातिवाद में ही हो गया

Akhilendra Pratap Singh

मौजूदा परिस्थिति में जरूरी राजनीतिक पहलकदमी के बारे में अखिलेन्द्र प्रताप सिंह की वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय से वार्ता के आधार पर कुछ बातें Now the work of the Left has become office-centric, the use of Lohia eventually collapses into casteism. On the basis of Akhilendra Pratap Singh’s talks with senior journalist Santosh Bhartiya about the political initiative required in the current …

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वामपंथ का आंतरिक विरोधाभास : अखिलेन्द्र प्रताप सिंह की एक जरूरी वार्ता

Akhilendra Pratap Singh

‘वामपंथ का आंतरिक विरोधाभास’ | ‘Left’s internal contradiction’ आईपीएफ और स्वराज अभियान के नेता व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष अखिलेन्द्र प्रताप सिंह (Akhilendra Pratap Singh) से लाउड इंडिया टीवी (Loud India TV) के लिए वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय ने लंबी बातचीत की। भारत में वामपंथ की विफलताओं और वामपंथ के आंतरिक विरोधाभास पर इस वार्ता को अवश्य सुना चाहिए।

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