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Tag Archives: संविधान

क्या धर्मनिरपेक्षता भारत की परंपराओं के लिए खतरा है?

Dr. Ram Puniyani

Hindi Article By Dr Ram Puniyani : Is Secularism a threat to Indian Traditions भारत को एक लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से मुक्ति मिली. यह संघर्ष समावेशी और बहुवादी था. जिस संविधान को आजादी के बाद हमने अपनाया, उसका आधार थे स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के वैश्विक मूल्य. धर्मनिरपेक्षता हमारे संविधान की मूल …

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आधी आबादी की पूरी आजादी के लिए जरूरी है फटी जींस के फटे संस्कारों को उखाड़ना

Today's Deshbandhu editorial

For the complete independence of half the population, it is necessary to uproot the torn rites of torn jeans देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today उत्तराखंड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की उम्र (Age of newly appointed Chief Minister of Uttarakhand Tirath Singh Rawat) 57 बरस है और साढ़े पांच दशक से अधिक की इस जीवन …

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जुगनुओं को कैद करता तानाशाह : यही है संघी-भाजपाई “राष्ट्रवाद” – जो शुरू से ही इतना ही फर्जी है

disha ravi

इस बार 21-22 वर्ष की दिशा रवि को बिना किसी तरीके की सुनवाई के सीधे 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिशा पर देशद्रोह, राष्ट्र के खिलाफ बगावत और न जाने कैसे-कैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं, अभी और कुछ आरोप गढ़े जाएंगे। कारपोरेट नियंत्रित मोदी मीडिया उन्हें और भी नमक-मिर्च लगाकर दोहरायेगा और पेड़,पौधे, नदी, पहाड़, …

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संविधान के उद्देश्यों को व्यर्थ करने वाले चैम्पियन शासक हैं नरेन्द्र मोदी !

Narendra Modi flute

सभी प्रधानमंत्रियों ने की संविधान निर्माता के चेतावनी की अनदेखी ! 26 November, Constitution Day in Hindi आज 26 नवम्बर है संविधान दिवस ! 1949 में आज ही के दिन बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने राष्ट्र को वह महान संविधान सौंपा था। भारतीय संविधान की उद्देशिका (Preamble of Indian Constitution) में भारत के लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय …

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भारतीय शासन व्यवस्था के कुछ और पहलुओं पर गौर करना भी आवश्यक है

Kaanoon, Samvidhaan Aur Desh

कानून, संविधान और देश | Kaanoon, Samvidhaan Aur Desh | Law, Constitution and country भारतवर्ष विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र (World’s largest democracy) है और हम गर्व करते हैं कि हमारा संविधान वृहद और परिपूर्ण है, फिर भी हम देखते हैं कि जनहित के नाम पर अक्सर ऐसे कानून बन जाते हैं जो असल में जनविरोधी होते हैं। श्रीमती इंदिरा गांधी …

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