आज सत्य की गतिविधियों पर पहरे हैं, क्योंकि स्वार्थ के कान, जन्म से बहरे हैं

Mukut Bihari 'Saroj'

इमरजेंसी का पूर्वाभास और मुक्तिबोध बकौल अशोक वाजपेयी Ashok Vajpayee, the foreboding of Emergency and Muktibodh The poem ‘Andhere men’ was written by Muktibodh in 1962–63 देश में चल रहे हालात को देख कर, एक पुरानी घटना याद आ गयी। कई वर्ष पहले राजनन्दगाँव [छत्तीसगढ] में आयोजित ‘त्रिधारा’ संगोष्ठी में व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध कवि