दंगा भड़काने में राजनीति का जितना हाथ है, उससे कम पत्रकारिता का नहीं, शुक्र है कि अब मैं पत्रकार नहीं हूं

dELHI dANGA pALASH bISWAS

Thankfully I am no longer a journalist 31 अक्टूबर 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी को गोली लगने पर पिताजी पुलिन बाबू अस्पताल में उन्हें देखने पहुंच गए थे। वे नारायणदत्त तिवारी के घर थे। तिवारीजी ही उन्हें अपने साथ अस्पताल से लाये थे। दिल्ली में रहकर उन्होंने भारत विभाजन का जख्म (Wound of partition of