हार्ट फेल्योर से बचना चाहते हैं तो खूब पिएं तरल पदार्थ : शोध

illustration blood cells bacteria

अच्छा जलयोजन (हाइड्रेशन-hydration) हृदय की गति रुकने के दीर्घकालिक जोखिम को कम कर सकता है (Good hydration may reduce long-term risks for heart failure)

सीरम सोडियम का स्तर हृदय रोग का अनुभव करने वाले वयस्कों की पहचान करने में मदद कर सकता है (Serum sodium levels may help identify adults with a greater chance of experiencing heart disease.)

नई दिल्ली, 30 मार्च 2022. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने से हृदय की गति रुकने के विकास के जोखिम में कमी आ सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने से दिल की विफलता के विकास के जोखिम में कमी आ सकती है। यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित उनके शोध – “Middle age serum sodium levels in the upper part of normal range and risk of heart failure” निष्कर्ष बताते हैं कि जीवन भर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन न केवल शरीर के आवश्यक कामकाज का समर्थन करता है, बल्कि भविष्य में हृदय की गंभीर समस्याओं के जोखिम को भी कम कर सकता है।

हार्ट फेल्योर क्या है? What is Heart failure? दिल की विफलता क्या है?

दिल की विफलता, एक पुरानी स्थिति जो तब विकसित होती है जब हृदय शरीर की जरूरतों के लिए पर्याप्त रक्त पंप नहीं करता है। यह 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में भी अधिक आम है।

प्रमुख अध्ययन लेखक और एनआईएच से संबद्ध राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान (National Heart, Lung, and Blood Institute -NHLBI), में कार्डियोवास्कुलर रीजनरेटिव मेडिसिन की प्रयोगशाला में एक शोधकर्ता नतालिया दिमित्रीवा, पीएचडी ने कहा, “नमक का सेवन कम करने के समान, पर्याप्त पानी पीना और हाइड्रेटेड रहना हमारे दिल को सहारा देने के तरीके हैं और हृदय रोग के लिए दीर्घकालिक जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।”

प्रीक्लिनिकल शोध, जो निर्जलीकरण और कार्डियक फाइब्रोसिस के बीच संबंध (connections between dehydration and cardiac fibrosis) का सुझाव देता है, करने के बाद, दिमित्रीवा और शोधकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर जनसंख्या अध्ययनों में समान एसोसिएशंस की तलाश की।

शोध शुरू करने के लिए, उन्होंने 45-66 आयु वर्ग के 15,000 से अधिक वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया, जिन्होंने 1987-89 के बीच एथेरोस्क्लेरोसिस रिस्क इन कम्युनिटीज (Atherosclerosis Risk in Communities -एआरआईसी) अध्ययन में खुद को नामांकित किया था और 25 साल की अवधि में चिकित्सा यात्राओं की जानकारी साझा की।

पूर्वव्यापी समीक्षा के लिए प्रतिभागियों का चयन करने में, वैज्ञानिकों ने उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया जिनके जलयोजन स्तर (hydration levels ) सामान्य सीमा के भीतर थे और जिन्हें अध्ययन की शुरुआत में मधुमेह (diabetes), मोटापा (obesity) या दिल की विफलता (heart failure) नहीं थी। लगभग 11,814 वयस्कों को अंतिम विश्लेषण में शामिल किया गया था, और शोधकर्ताओं ने पाया कि उनमें से 1,366 (11.56%) में बाद में हार्ट फेल्योर विकसित हुआ।

हाइड्रेशन के साथ संभावित संबंधों का आकलन करने के लिए, टीम ने कई नैदानिक ​​उपायों का उपयोग करके प्रतिभागियों की जलयोजन स्थिति का आकलन किया।

सीरम सोडियम के स्तर (levels of serum sodium) को देखते हुए, जो शरीर के द्रव के स्तर में कमी के रूप में बढ़ता है, विशेष रूप से हृदय की विफलता के विकास के जोखिम (increased risk for developing heart failure) वाले प्रतिभागियों की पहचान करने में मदद करने में उपयोगी था।

इसने वृद्ध वयस्कों को दिल की विफलता और बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी ( left ventricular hypertrophy), दोनों के डेवलप होने के जोखिम में वृद्धि करने में मदद की। बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी या बाएं निलय अतिवृद्धि हृदय के मुख्य पंपिंग कक्ष की दीवार का मोटा होने की स्थिति होती है। इस गाढ़ेपन के परिणामस्वरूप हृदय के भीतर दबाव बढ़ सकता है और कभी-कभी खराब पंपिंग क्रिया हो सकती है। इसका सबसे आम कारण उच्च रक्तचाप है।

उदाहरण के लिए, सीरम सोडियम के स्तर वाले वयस्क जिनका स्तर 143 मिलीइक्विवेलेंट प्रति लीटर (mEq/L) से शुरू होता है – (एक सामान्य सीमा 135-146 mEq/L है), में मध्य जीवन में निम्न स्तर वाले वयस्कों की तुलना में हार्ट फेल्योर के विकसित होने का जोखिम 39% था। और 135-146 mEq/L की सामान्य सीमा के भीतर सीरम सोडियम में प्रत्येक 1 mEq/L वृद्धि के लिए, एक प्रतिभागी के दिल की विफलता विकसित होने की आशंका 5% बढ़ जाती है।

70-90 आयु वर्ग के लगभग 5,000 वयस्कों के एक समूह में, मध्यम आयु में 142.5-143 mEq/L के सीरम सोडियम स्तर वाले लोगों में बाएं निलय अतिवृद्धि विकसित होने की आशंका 62% अधिक थी।

143 mEq/L से शुरू होने वाले सीरम सोडियम का स्तर बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी के लिए 102% बढ़े हुए जोखिम और हार्टफेल्योर के लिए 54% बढ़े हुए जोखिम के साथ सहसंबद्ध है।

इन आंकड़ों के आधार पर, लेखकों ने निष्कर्ष निकाला है कि मध्यम आयु में 142 एमईक्यू / एल से ऊपर सीरम सोडियम स्तर बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी और बाद में जीवन में हार्ट फेल्योर विकसित होने के जोखिम में वृद्धि से जुड़ा हुआ है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इन प्रारंभिक निष्कर्षों की पुष्टि के लिए एक यादृच्छिक, नियंत्रित परीक्षण (A randomized, controlled trial) आवश्यक होगा। हालांकि, इन शुरुआती परिणामों का सुझाव है कि अच्छा जलयोजन हृदय के भीतर परिवर्तनों की प्रगति को रोकने या धीमा करने में मदद कर सकता है जिससे हार्ट फेल्योर हो सकता है।

मैनफ्रेड बोहेम, एमडी, जो कार्डियोवैस्कुलर रीजनरेटिव मेडिसिन की प्रयोगशाला का नेतृत्व करते हैं (Manfred Boehm, M.D., who leads the Laboratory of Cardiovascular Regenerative Medicine), ने कहा, “सीरम सोडियम और तरल पदार्थ के सेवन का आसानी से नैदानिक ​​परीक्षाओं में मूल्यांकन किया जा सकता है और डॉक्टरों को उन रोगियों की पहचान करने में मदद करता है जो हाइड्रेटेड रहने के तरीकों के बारे में सीखने से लाभान्वित हो सकते हैं।”

तरल पदार्थ क्यों जरूरी हैं? Why are Fluids essential?

कई शारीरिक कार्यों के लिए तरल पदार्थ आवश्यक हैं, जिसमें हृदय को रक्त को कुशलतापूर्वक पंप करने में मदद करना, रक्त वाहिका के कार्य का समर्थन करना और परिसंचरण को व्यवस्थित करना शामिल है। शोधकर्ताओं ने कहा फिर भी बहुत से लोग जरूरत से बहुत कम तरल पदार्थ लेते हैं, जबकि तरल दिशानिर्देश शरीर की जरूरतों के आधार पर भिन्न होते हैं, शोधकर्ताओं ने महिलाओं के लिए 6-8 कप (1.5-2.1 लीटर) और पुरुषों के लिए 8-12 कप (2-3 लीटर) के दैनिक तरल पदार्थ का सेवन करने की सिफारिश की। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (The Centers for Disease Control and Prevention) भी स्वस्थ जलयोजन का समर्थन करने के लिए सुझाव प्रदान करता है।

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पोषण का प्रभावी स्रोत हैं झारखंड की पत्तेदार सब्जी प्रजातियां

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The leafy vegetable species of Jharkhand are an effective source of nutrition.       

नई दिल्ली, 06 अप्रैल : गोभी, पालक, मटर, शिमला मिर्च, गाजर और आलू जैसी सब्जियां रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कुछ ऐसी सब्जियां हैं, जिनका प्रचलन देशभर में है। वहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सैकड़ों विशिष्ट सब्जी प्रजातियां पायी जाती हैं, जो पोषण से भरपूर होने के बावजूद वह लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी हैं, जो आलू, गोभी, मटर, पालक, भिंडी, लौकी, कद्दू और इसके जैसी अन्य सब्जियों को मिली है। हालांकि, ऐसी सब्जी प्रजातियां गरीब और पिछड़ेपन का शिकार माने जाने वाले झारखंड के जनजातीय लोगों के भोजन का एक अहम हिस्सा हैं।

Leafy vegetables used by the local tribals of Jharkhand

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पटना एवं रांची स्थित पूर्वी अनुसंधान परिसर के शोधकर्ताओं ने झारखंड के स्थानीय आदिवासियों द्वारा उपयोग की जाने वाली पत्तेदार सब्जियों की 20 ऐसी प्रजातियों की पहचान की है, जो पौष्टिक गुणों से युक्त होने के साथ-साथ भोजन में विविधता को बढ़ावा दे सकती हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पोषण एवं खाद्य सुरक्षा (Nutrition and Food Safety) सुनिश्चित करने में भी सब्जियों की ये स्थानीय प्रजातियां मददगार हो सकती हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकतर सब्जियों के बारे में देश के अन्य हिस्सों के लोगों को जानकारी तक नहीं है।

इस अध्ययन के दौरान रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूमि, रामगढ़ और हजारीबाग समेत झारखंड के सात जिलों के हाट (बाजारों) में सर्वेक्षण कर वहां उपलब्ध विभिन्न मौसमी सब्जियों की प्रजातियों के नमूने एकत्रित किए हैं। इन सब्जियों में मौजूद पोषक तत्वों, जैसे- , कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्निशयम, पोटैशियम, सोडियम और सल्फर, आयरन, जिंक, कॉपर एवं मैगनीज, कैरोटेनॉयड्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का पता लगाने के लिए नमूनों का जैव-रासायनिक विश्लेषण किया गया है।

विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर जनजातीय इलाकों में पायी जाने वाली ये पत्तेदार सब्जियां स्थानीय आदिवासियों के भोजन का अहम हिस्सा होती हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्निशयम, आयरन, पोटैशियम जैसे खनिज तथा विटामिन पाए गए हैं। इन सब्जियों में फाइबर की उच्च मात्रा होती है, जबकि कार्बोहाइड्रेट एवं वसा का स्तर बेहद कम पाया गया है। शोध पत्रिका करंट साइंस में प्रकाशित यह अध्ययन अनुराधा श्रीवास्तव, आर.एस. पैन और बी.पी. भट्ट द्वारा किया गया है।

सब्जियों की इन प्रजातियों में लाल गंधारी, हरी गंधारी, कलमी, बथुआ, पोई, बेंग, मुचरी, कोईनार, मुंगा, सनई, सुनसुनिया, फुटकल, गिरहुल, चकोर, कटई/सरला, कांडा और मत्था इत्यादि शामिल हैं। ये सब्जी प्रजातियां झारखंड के आदिवासियों के भोजन का प्रमुख हिस्सा हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जनजातीय लोग लाल गंधारी, हरी गंधारी और कलमी का भोजन में सबसे अधिक उपयोग करते हैं। वहीं, गिरहुल अपेक्षाकृत रूप से कम लोकप्रिय है।

बरसात एवं गर्मी के मौसम में विशेष रूप से जनजातीय समुदाय के लोग खाने योग्य विभिन्न प्रकार के पौधे अपने आसपास के कृषि, गैर-कृषि एवं वन्य क्षेत्रों से एकत्रित करके सब्जी के रूप में उपयोग करते हैं। इन सब्जियों को विभिन्न वनस्पतियों, जैसे- झाड़ियों, वृक्षों, लताओं, शाक या फिर औषधीय पौधों से प्राप्त किया जाता है।

सब्जियों को साग के रूप में पकाकर, कच्चा या फिर सुखाकर खाया जाता है। सुखाकर सब्जियों का भंडारण भी किया जाता है, ताकि पूरे साल उनका भोजन के रूप में उपभोग किया जा सके। अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न मौसमों में भिन्न प्रकार की सब्जियां उपयोग की जाती हैं। इनकी पत्तियों, टहनियों और फूलों को मसालों अथवा मसालों के बिना पकाकर एवं कच्चा खाया जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि “इन सब्जियों की उपयोगिता के बावजूद इन्हें गरीबों एवं पिछड़े लोगों का भोजन माना जाता है, और व्यापक रूप से कृषि चक्र में ये सब्जियां शामिल नहीं हैं। जबकि, सब्जियों की ये प्रजातियां खाद्य सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और आमदनी का जरिया बन सकती हैं। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बेहद कम संसाधनों में इनकी खेती की जा सकती है।”

(इंडिया साइंस वायर)