विमर्श के लिए ज़रूरी नहीं होते हैं शब्द !

जब सोशल मीडिया नहीं देखती हैं गीतांजलि श्री तो जवाब किसे दे रही हैं? लकान का ‘बिना शब्दों का विमर्श‘ और गीतांजलि श्री का व्यवहार.

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आखिर डेढ़ पसली के गांधी से कौन डरता है?

अगली 30 जनवरी को, गांधी की हत्या के 75 साल पूरे हो जाएंगे। बेशक, उस डेढ़ पसली के शख्स का कुछ तो डर है कि हिंदुत्ववादी, उसे मार कर 75 साल बाद भी निश्चिंत नहीं हो पाए हैं और बार-बार मारते ही जा रहे हैं।

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क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहेंगे?

लोग क्या कहेंगे, लोग क्या सोचेंगे, इन दोनों के बीच की कड़ी पर चलने के लिए अत्यधिक न्यायिक कौशल की आवश्यकता होती है। यह एक

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हंसी सबसे अच्छी दवा है : मुनव्वर फारूकी

स्टेंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Standup Comedian Munawwar Farooqui) बेंगलुरू में एक परोपकारी संस्था के लिए अपना शो करने वाले थे. पूरे टिकट बिक चुके थे.

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