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Tag Archives: स्वाधीनता संग्राम

किसान आंदोलनों की परंपरा और किसान आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

Agriculture Bill will destroy agriculture - Mazdoor Kisan Manch

The tradition of peasant movements and a brief history of peasant movements 26 नवम्बर को किसानों का दिल्ली कूच कार्यक्रम है। वे वहां पहुंच पाते हैं या नहीं यह तो अभी नहीं बताया जा सकेगा, लेकिन तीन नए कृषि कानूनो के असर देश की कृषि व्यवस्था पर पड़ने लगे है। धान की खरीद पर इसका असर साफ दिख रहा है। …

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रायबरेली में एसपी रहे अफसर बोले – राहुल एक संवेदनशील और मुखर व्यक्ति, ओबामा उन्हें इग्नोर करने का साहस न जुटा पाए

Rahul Gandhi

हम सब अपने-अपने परसेप्शन खुद ही गढ़ते हैं हमारी समस्या एक यह भी है कि, हम यह चाहते हैं कि किसी व्यक्ति, विचार या घटना के बारे में जो मेरा परसेप्शन हो, वही हर व्यक्ति का भी हो। हम यह भूल जाते हैं कि, हर व्यक्ति किसी भी घटना, व्यक्ति और विचार के बारे में अलग-अलग तरह से सोचता है …

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गुलामी से मुक्ति : बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे की अनदेखी!

Bihar assembly election review and news

Freedom from slavery: Biggest issue ignored in Bihar assembly elections! बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण (First phase of Bihar assembly election) का वोट पड़ चुका है और पार्टियां अगले चरणों के चुनाव के प्रचार में जुट चुकी हैं. अब तक के चुनाव प्रचार में जितने भी मुद्दे उठाए गए हैं, उनमें तेजस्वी यादव द्वारा सत्ता में आने पर 10 …

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डॉ. राम पुनियानी का लेख – विविधता : राष्ट्रनिर्माण में सहायक या बाधक

Dr. Ram Puniyani

हिन्दी में डॉ. राम पुनियानी का लेख – विविधता : राष्ट्रनिर्माण में सहायक या बाधक Dr. Ram Puniyani’s article in Hindi – Diversity: Aiding or inhibiting nation building क समाचार के अनुसार, ब्रिटेन के चांसलर ऑफ़ द एक्सचेकर ऋषि सुनाक ने 17 अक्टूबर 2020 को 50 पेन्स का एक नया सिक्का जारी किया. सिक्के को ‘डायवर्सिटी क्वाइन’ का नाम दिया …

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बेशर्मी और निर्लज्जता की हदें पार करते महामहिम!

bhagat singh koshyari with Udhav Thackrey

संवैधानिक पदों को कलंकित करते राज्यपाल राष्ट्रपति के बाद राज्यपाल का पद ही संवैधानिक गरिमा में सबसे ऊपर माना जाता है लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार नहीं जिन राजनेताओं को राज्यपाल की कुर्सी पर बैठाया है उन्होंने न केवल संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है बल्कि राजभवन में बैठकर एक पार्टी के नेता जैसा व्यवहार करते हुए सारी संवैधानिक मर्यादाओं …

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पूछता है भारत : क्या आप अपनी संतान को गोडसे बनाना चाहेंगे ?

It is necessary to bring back the lost politics

The nation wants to know: Would you like to make your child Godse? भटक चुकी राजनीति को पटरी पर लाना ज़रूरी है, Hathras gang rape case should be studied as a model case राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कल 3 अक्टूबर हाथरस गैंगरेप की पीड़िता के घर (Hathras gang rape victim’s house) में थे। वे वहां अन्य विपक्षी सांसदों के …

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बहुजन कैसे लड़ें अपनी आज़ादी की लड़ाई ! मात्र 70 साल में ही बाजी पलट गई. जहाँ से चले थे उसी जगह पहुंच रहे हैं हम।

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

यह लेख समर्पित है : झारखंड के आंबेडकर डॉ. विजय कुमार त्रिशरण को ! | This article is dedicated to Dr. Vijay Kumar Trisharan, Ambedkar of Jharkhand! आज़ादी के सपने ! | Dreams of freedom! आज 15 अगस्त है: भारत का स्वाधीनता दिवस! 73 साल पूर्व आज ही के दिन भारत के लोग विदेशियों की हजारों साल लंबी गुलामी झेलकर आज़ाद हुये …

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एक विलक्षण स्वतंत्रता सेनानी स्व. रतन लाल बंसल

A unique freedom fighter Late Ratan Lal Bansal

A unique freedom fighter Late Ratan Lal Bansal नौजवान पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि देश सेवा और समाज सेवा की कोई कीमत नहीं होती। जिन देशभक्तों ने इस उक्ति को सच साबित किया उनमें फिरोजाबाद के स्व. रतन लाल बंसल का नाम प्रमुख है। स्वत्रंत्रता सेनानी,लेखक एवं पत्रकार स्व. श्री रतन लाल बंसल का जन्म सन् 1919 फिरोजाबाद …

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मोदी ने बहुजनों को गुलामों की स्थिति में डाल दिया है

Prime Minister, Shri Narendra Modi paying tributes to the Martyrs during the Virtual Conference with the Chief Ministers, in New Delhi on June 17, 2020.

Modi has put Bahujans in the status of slaves. मोदी ने बहुजनों के समक्ष नहीं छोड़ा है कोई विकल्प! |  मुक्ति की लड़ाई में उतरने से भिन्न                                 2014 में बेरोजगारों को हर साल 2 करोड़ नौकरियाँ देने तथा प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 100 दिन के अंदर 15 लाख जमा कराने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने …

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प्रेमचन्द का पाठ वस्तुतः गरीब, दरिद्र और वंचितों का पाठ है

Munshi Premchand

प्रेमचंद और आलोचना की चुनौतियाँ -1 | Premchand and the challenges of criticism-1 इस समय आलोचना जिस संकट में है उसमें नए –पुराने दोनों ही किस्म के समालोचकों के पास जाने की जरूरत है। आलोचना के संकटग्रस्त होने की अवस्था में पुराने आलोचक और सिद्धांत ज्यादा मदद करते हैं। हिन्दी में नया संकट दो स्तर पर है। पहला संकट यथार्थबोध के …

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अंतर्विरोधों से भरे लेकिन बुनियादी तौर पर उदार व्यक्तित्व श्यामाचरण शुक्ल

Shyama Charan Shukla Biography Hindi

Shyama Charan Shukla (श्यामा चरण शुक्ल) Former Chief minister of Madhya pradesh श्यामाचरण शुक्ल के अंतर्विरोधों से भरे लेकिन बुनियादी तौर पर उदार व्यक्तित्व की एक घटना का वर्णन कर हम आगे बढ़ेंगे। 1970 में वे मुख्यमंत्री के रूप में जबलपुर आए थे। छात्रों का आंदोलन चल रहा था। छात्रों ने रास्ते में उनका काफिला रोकने की कोशिश की। पुलिस …

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धार्मिक स्वातंत्र्य : कहां खड़ा है भारत

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

India is a pluralistic country with many religions भारत अनेक धर्मों वाला बहुवादी देश है। हिन्दू धर्म के मानने वालों का यहाँ बहुमत है परन्तु इस्लाम और ईसाई धर्म में आस्था रखने वालों की संख्या भी कम नहीं है। हमारे स्वाधीनता संग्राम के नेता (Leaders of our freedom struggle) सभी धर्मों को बराबरी का दर्जा देते थे परन्तु सांप्रदायिक ताकतें …

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सावरकर, द्विराष्ट्र सिद्धांत और हिंदुत्व

savarkar

Savarkar, Two-Nation Theory and Hindutva गत 28 मई, 2020 को विष्णु दामोदर सावरकर फिर चर्चा में थे. उस दिन जहां कर्नाटक में विपक्षी दलों ने येलाहांका फ्लाईओवर का नाम सावरकर के नाम पर रखने का विरोध किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि सावरकर ने अनेक व्यक्तियों को स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा …

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नफरत की आंधी नहीं बुझा सकेगी इंसानियत की शमा

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

The storm of hate will not be able to extinguish humanity इस समय हमारा देश कोरोना महामारी की विभीषिका (The devastation of the corona epidemic) और उससे निपटने में सरकार की गलतियों के परिणाम भोग रहा है. इस कठिन समय में भी कुछ लोग इस त्रासदी का उपयोग एक समुदाय विशेष का दानवीकरण करने के लिए कर रहे हैं. नफ़रत …

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क्या हम इस्लामोफोबिया के बढ़ते संक्रमण को रोक सकते हैं?

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Can we stop the growing infection of Islamophobia? 9/11 2000 के डब्ल्यूटीसी हमले के बाद ‘इस्लामोफोबिया’ (इस्लाम के प्रति डर या घृणा का भाव) शब्द का प्रचलन अचानक बहुत बढ़ गया. इस घटना के बाद अमरीकी मीडिया ने ‘इस्लामिक आतंकवाद’ शब्द का भी बड़े पैमाने पर उपयोग करना शुरू कर दिया. दुनिया के इतिहास में पहली बार किसी धर्म को …

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लड़खड़ाते लोकतंत्र में सोशलिस्ट नेता मधु लिमए को याद करने के मायने

Madhu Limaye

Meaning of remembering socialist leader Madhu Limaye in a faltering democracy आज भारतीय लोकतंत्र का जिस्म तो बुलंद है, पर इसकी रूह रुग्ण हो चली है। ऐसे में जोड़, जुगत, जुगाड़ या तिकड़म से सियासत को साधने वाले दौर में मधु लिमए की बरबस याद आती है। राजनीति के चरमोत्कर्ष पर हमें सन्नाटे में से ध्वनि, शोर में से संगीत …

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कोरोना और ग्लोबल वार्मिंग से भी बड़ी समस्या है: आर्थिक और सामाजिक विषमता!

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

लॉकडाउन का एक महीना पूरा होने पर | On completion of one month of lockdown कोरोना से पार पाने के लिए देश में जो लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हुआ, उसके एक माह पूरा हो चुका है। इन विगत 30 दिनों में कुछेक अपवादों को छोडकर हमने धैर्य और सहनशीलता तथा सादगीपूर्ण जीवन- शैली का नया अध्याय रचा. इस दरम्यान हमने …

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आज की चुनौतियां और भगत सिंह

Bhagat Singh

Today’s challenges and Bhagat Singh भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को फांसी की सजा दी गई थी और अपनी शहादत के बाद वे हमारे देश के उन बेहतरीन स्वाधीनता संग्राम सेनानियों में शामिल हो गये , जिन्होने देश और अवाम को निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दी। उन्होंने अंगेजी साम्राज्यवाद को ललकारा। मात्र 23 साल की उम्र में उन्होनें …

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यदि कांशीराम न होते ?

KanshiRam कांशीराम

If Kanshi Ram were not there? आज एक ऐसे महापुरुष का जन्मदिन है जो अगर भारत भूमि पर भूमिष्ठ नहीं हुआ होता तो हज़ारों साल की दास जातियों में शासक बनने की महत्वाकांक्षा पैदा नहीं होती; लाखों पढ़े-लिखे नौकरीशुदा दलितों में ‘पे बैक टू दि सोसाइटी ‘की भावना (The spirit of ‘pay back to the society’ among employed Dalits) नहीं …

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हू इज भारत माता | नेहरू के लिए राष्ट्रवाद का क्या अर्थ था

jawahar lal nehru

‘भारत माता की जय’ मार्का राष्ट्रवाद | Nationalism in Hindi, समय के साथ, हमारी दुनिया में राष्ट्रीयता का अर्थ बदलता रहा है. राजनैतिक समीकरणों में बदलाव तो इसका कारण रहा ही है विभिन्न राष्ट्रों ने समय-समय पर अपनी घरेलू नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ अपने बदलते रिश्तों के संदर्भ में भी इस अवधारणा की पुनर्व्याख्या की हैं. राष्ट्रीयता की कई …

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देश पिछड़ गया तो क्या, मोदी तो संघ का एजेंडा पूरा करने में उम्मीद से आगे निकल गए हैं  

Narendra Modi in anger

अच्छे दिन लाने और प्रत्येक के खाते में सौ दिन के अन्दर 15 लाख जमा कराने तथा हर साल युवाओं को दो करोड़ नौकरियां देने के वादे (Promises to provide 20 million jobs to youth every year) के साथ सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे हो गए हैं। अवश्य ही मोदी इस दरम्यान जहाँ …

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