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Tag Archives: स्वामी विवेकानंद

मानवतावादी और सार्वभौमिक था विवेकानंद का राष्ट्रवाद, वह संकीर्ण या आक्रामक नहीं था

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स्वामी विवेकानंद का राष्ट्रवाद और स्वामी विवेकानंद का भारत नेहा दाभाडे का यह लेख हस्तक्षेप पर जून 22, 2019 को “स्वामी विवेकानंद का भारत और राष्ट्रवाद, दूसरों के प्रति घृणा नहीं फैलाता, उनका राष्ट्रवाद भारतीयों को बेहतर मनुष्य बनाता है” शीर्षक से प्रकाशित हुआ था। इस लेख में लेखिका विस्तार से चर्चा कर रही हैं कि स्वामी विवेकानंद का भारत …

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जन साधारण के राज की बात करते हैं रैदास जी

रैदास जी जन साधारण के राज की बात करते हैं। एक ऐसे लोकतांत्रिक गणराज्य की जिसमें जनता की भौतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक सभी जरूरतें पूरी हों। रैदास की बेगमपुरा रचना प्लेटो, थामस मूर के विचार की तरह यूटोपियन नहीं है, यह ठोस व व्यावहारिक है तथा लोगों की आवश्यकता के अनुरूप है।  संत रैदास वाणी ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन …

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गाय के पहले दुःखी इंसान की सहायता करनी चाहिए : स्वामी विवेकानंद

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Swami Vivekananda’s thoughts about cow protection and human safety Hindi Article by L.S. Hardenia – Vivekanand on Cow Protection मध्यप्रदेश सरकार ने गायों की देखरेख के लिए उपकर लगाने का फैसला किया है। इस संबंध में विभिन्न प्रतिक्रियाएं हुई हैं। यहां हम गौरक्षा एवं इंसान की रक्षा के बारे में स्वामी विवेकानंद के विचार प्रकाशित कर रहे हैं। उनके विचारों …

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शिकागो भाषण से स्वामी विवेकानंद ने बजाया भारतीय अध्यात्म का डंका

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शिकागो वक्तृता दिवस (11 सितम्बर) पर विशेष | Article on Chicago Speech Day (11 September) 11 सितम्बर 1893 को शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म पर स्वामी विवेकानंद का भाषण | Swami Vivekananda‘s speech on Hinduism at the World Religion Conference in Chicago on September 11, 1893 स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी मूलमंत्र | Inspirational Credentials of Swami Vivekananda युवाओं …

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