हाथरस गैंगरेप : व्यवस्था और मानवता का अंतिम संस्कार, बचता तानाशाह भी नहीं है। उसका अंत तो और भी दारुण होता है

HATHRAS हाथरस गैंगरेप : व्यवस्था और मानवता का अंतिम संस्कार

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का चुपके से रात के अंधेरे में समस्त मानवीय और वैधानिक मूल्यों को दरकिनार कर किया गया अंतिम संस्कार अनुचित है और बचता तानाशाह भी नहीं है। उसका अंत तो और भी दारुण होता है …. बता रहे हैं अवकाशप्राप्त आईपीएस अफसर विजय शंकर सिंह