वर्ण और जाति मुक्त भारत का संघी अभियान : नौ सौ चूहे खाके बिल्ली का हज करने का ऐलान

दलितों और पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए किये जाने वाले विशेष प्रावधानों का आरएसएस हमेशा से विरोधी रहा। इनके बारे में उनकी हिकारत इस कदर रही कि गोलवलकर ने इन तबकों को “माँस का टुकड़ा फेंकने पर इकट्ठे होने वाले कौए” तक बता दिया।

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