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Tag Archives: ख़्वाजा अहमद अब्बास

बंगाल का अकाल और ख़्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘धरती के लाल’

Bengal famine and Khwaja Ahmed Abbas’s film ‘Dharti Ke Lal’ –उषा वैरागकर आठले अकाल पहले भी पड़ते थे। भारत का किसान पहले भी दुर्दिनों में जीता था। साहूकारों और ज़मींदारों का शोषण पहले भी हुआ करता था। हालात पहले भी खराब थे लेकिन अंग्रेजी साम्राज्यवाद के गुलाम बन जाने के बाद शोषण का स्तर इतना बढ़ गया कि किसान भीख …

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दिग्गजों की पहली फ़िल्म “धरती के लाल” पर हुई परिचर्चा का प्रीमियर आज

इंदौर, 10 अगस्त 2021. ख़्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन की पहली फ़िल्म “धरती के लाल” (Khwaja Ahmed Abbas’s directorial debut “Dharti Ke Lal”) बलराज साहनी, शम्भु मित्रा, जोहरा सहगल, तृप्ति भादुड़ी मित्रा आदि दिग्गज कलाकारों के अभिनय की भी पहली फ़िल्म थी। यह फ़िल्म भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा) द्वारा बनाई गई पहली फ़िल्म भी थी और 1943 के बंगाल के …

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विरासत से नहीं बल्कि हालात से बनता है इंसान : ख़्वाजा अहमद अब्बास

“आवारा” एवं “अनहोनी” फिल्म पर कार्यक्रम का प्रीमियर इंदौर 4 अगस्त 2021. भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा)- Indian Public Theater Association (IPTA) द्वारा ख़्वाजा अहमद अब्बास के रचनाकर्म पर केंद्रित ऑनलाइन कार्यक्रमों की श्रृंखला की चौथी कड़ी (Online programs focused on the work of Khwaja Ahmad Abbas) में “आवारा” एवं “अनहोनी” फिल्म पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में …

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“आवारा” एवं “अनहोनी” फिल्म पर कार्यक्रम का प्रीमियर

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

नई दिल्ली, 02 अगस्त 2021. भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा)- Indian People’s Theater Association (IPTA) द्वारा ख़्वाजा अहमद अब्बास के रचनाकर्म पर केंद्रित ऑनलाइन कार्यक्रमों की श्रृंखला की चौथी कड़ी में “आवारा” एवं “अनहोनी” फिल्म पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में थप्पड़, गुलाम, द्रोहकाल, आरक्षण जैसी प्रसिद्ध फिल्मों के लेखक अंजुम रजब अली ख़्वाजा अहमद अब्बास की कहानियों …

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सरहदें बाँटती हैं तो इंसानियत जोड़ती है : अब्बास

“हिना” फिल्म पर इप्टा की परिचर्चा की रिपोर्ट IPTA talks report on ‘Hina’ movie हिना की कहानी इंदौर, 29 जुलाई 2021. “हिना” फिल्म इंसानियत को बयां करती दो दिलों की प्रेम कहानी है. इसमें प्रेम, इंसानियत के मूल्यों के साथ जी रहे आमलोगों की जिंदगी में मचने वाली खलबली है जो सियासत ने सरहद की लकीरें खींच कर उठाई है. …

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