आह गुलज़ार देहलवी ! जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़िबह होती है

मशहूर शायर गुलज़ार देहलवी को ख़िराज-ए-अक़ीदत मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़ टूटा  है  आस्माँ से कोई  हसीन  तारा ऐ सोज़ अंजुमन में अब सोग की फ़िजा

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