दोनों शरीक-ए-जुर्म हैं! ये सरकारें चल रही हैं या मनोरंजन कम्पनियां ???

Arvind Kejriwal Narendra modi

दोनों शरीक-ए-जुर्म हैं! दिल्ली में एक ओर लोगों को बेड नहीं मिल रहा, अस्पतालों के गेट पर टेस्ट, भर्ती के लिए तड़पते लोग दम तोड़ दे रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में एडमिशन नहीं हो रहा और इलाज इतना मँहगा कि आम लोगों के लिए असम्भव ! वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 70

जनविरोधी होने का ऐसा साहस भाजपा भी नहीं कर सकती, जैसा केजरीवाल करते हैं

Arvind Kejriwal

दिल्ली केवल दिल्ली वालों के लिए: केजरीवाल का अनुचित फरमान कोविड-19 महामारी भयावह रफ्तार से देश में बढ़ती जा रही है और इससे निपटने की कोई कारगर तैयारी नहीं दिखती है। अब यह सभी लोग मानने लगे हैं कि बिना तैयारी के लाकडाउन किया गया और बिना किसी तैयारी के ही लाकडाउन को हटाया गया

संकट के समय बयानबाजी की राजनीति से बाहर निकलें केजरीवाल, इधर भी ध्यान दें

Arvind Kejriwal

Kejriwal should quit politics of rhetoric during crisis, pay attention here too नई दिल्ली, 09 अप्रैल 2020. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संकट के समय भी ओछी राजनीति करने में परंपरागत राजनीतिज्ञों को मात देते दिखाई देते हैं। लोकलुभावन घोषणाएं करने में कुछ नहीं जाता है, लेकिन इन घोषणाओं पर दस फीसदी ही अमल कर

अगर जरूरत पड़ी तो दिल्ली को लॉकडाउन करेंगे :  अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal

Will lockdown Delhi if needed: Arvind Kejriwal नई दिल्ली, 21 मार्च 2020 : दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोनवायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शनिवार को कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो दिल्ली को ‘लॉकडॉउन’ किया जाएगा। दिल्ली में कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सरकार ने यहां के सिनेमाहॉलों, मॉल, रेस्तरां को बंद

मैं केजरीवाल में एक पोटेंशियल फासिस्ट देखता हूँ

Arvind Kejriwal

I see a potential fascist in Arvind Kejriwal कनक तिवारी जी की एक एफबी पोस्ट पर मैंने कमेंट किया कि अरविंद केजरीवाल की आरएसएस भाजपा के शीर्षस्थ नेतृत्व से एक मिली भगत है। तो उन्होंने कहा कि बताइये आप ये बात कैसे कह रहे हैं। तो मैंने उन्हें निम्नवत जवाब भेजा है। मुझे लगा कि

फोर्ड फाउंडेशन के बच्चों का राजनीतिक आख्यान : ‘दिल्ली में तो केजरीवाल’ का जो हल्ला मचाया गया है, उसमें कम्युनिस्टों की बड़ी भूमिका है.

Arvind Kejriwal

पिछले दिनों ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक खबर पर नज़र गई थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दावा (Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal claims) छपा था कि उन्होंने राजनीति का आख्यान (नैरेटिव) बदल दिया है. पिछली सदी के अंतिम दशकों में जब इतिहास से लेकर विचारधारा तक के अंत की घोषणा हुई थी तो