अच्छे दिन : अबकी बार नीतीश कुमार की “नीतीशकुमार-मुक्त” भाजपा सरकार

Nitish Kumar Bihar CM

और अंत में अकाली दल, शिव सेना आदि की तरह, जदयू को भी भाजपा एक दिन बाहर का दरवाजा दिखा ही देगी। आखिरकार, मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की लगातार चौथी पारी (Nitish Kumar‘s fourth consecutive innings as Chief Minister) शुरू हो गयी है। सोमवार को दोपहर बाद, उन्होंने सातवीं बार, पद और गोपनीयता

अब बिहार किधर

Bihar assembly election review and news

अब बिहार किधर : एआईपीएफ की 21 नवम्बर को आयोजित वर्चुअल राष्ट्रीय समिति की विस्तारित बैठक में बिहार चुनाव की समीक्षा और ‘अब बिहार किधर’ पर चर्चा होगी।..

हार मान चुके हैं नीतीश ! बोले राजग की बैठक में तय होगा मुख्यमंत्री, मैंने कभी दावा पेश नहीं किया

Nitish Kumar Bihar CM

बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, का जवाब देते हुए नीतीश ने कहा, मैं कहां कोई दावा कर रहा हूं? निर्णय राजग द्वारा लिया जाएगा। हमारा अभियान पूरे राजग के लिए था, लेकिन प्रत्याशी नहीं होने के बावजूद ढूंढ़-ढूंढ़कर सिर्फ हमारी ही सीटों पर उम्मीदवार खड़े कर नुकसान पहुंचाया गया।

बिहार के पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार : लालू, मोदी या कोई और!

Lalu Prasad Yadav

भारी अफसोस की बात है कि लॉकडाउन के अविवेकपूर्ण फैसले से जो दो बड़ी बातें हिन्दी पट्टी, विशेषकर बिहार के बहुजन मजदूरों के खिलाफ गयीं, उसके लिए सिर झुकाकर माफी मांगने के बजाय मोदी आज लालू को जिम्मेदार ठहराकर लॉक डाउन की दुर्दशा से बिहार के लोगों का ध्यान भटकाने की कुत्सित साजिश कर रहे हैं.
निश्चय ही लॉकडाउन में हुई बेपनाह तकलीफ के लिए बिहार की जनता मोदी को चुनाव में दंडित करेगी.

गुलामी से मुक्ति : बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे की अनदेखी!

Bihar assembly election review and news

Freedom from slavery: Biggest issue ignored in Bihar assembly elections! बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण (First phase of Bihar assembly election) का वोट पड़ चुका है और पार्टियां अगले चरणों के चुनाव के प्रचार में जुट चुकी हैं. अब तक के चुनाव प्रचार में जितने भी मुद्दे उठाए गए हैं, उनमें तेजस्वी यादव द्वारा

बिहार : चक्रव्यूह में फंसे नीतीश अब तो हार के ही जीत सकते हैं

Nitish Kumar Bihar CM

इतना साफ है कि प्रधानमंत्री के चुनाव मैदान में उतरने तक ही, सत्ताधारी मोर्चे का राजनीतिक-वैचारिक नेतृत्व मजबूती से संघ-भाजपा के हाथों में पहुंच चुका है। इसके बाद, नीतीश कुमार येन-केन-प्रकारेण अगर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने भी रहते हैं, तब भी वह भाजपा की कृपा के ही मोहताज होंगे