ऐसा नहीं है कि असहिष्णुता सिर्फ सवर्णों की होती है, बाबासाहेब जैसे अद्भुत विद्वान राजनेता के अनुयायी भी कम असहिष्णु नहीं

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

वरिष्ठ पत्रकार पलाश विश्वास का यह आलेख हस्तक्षेप पर मूलतः April 19, 2016 को प्रकाशित हुआ था। पाठकों के लिए पुनर्प्रकाशन हम दीपा कर्मकार की उपलब्धियों (achievements of Deepa Karmakar) पर लिख नहीं रहे हैं। इस बारे में अगर आपकी दिलचस्पी है तो मीडिया के सौजन्य से आपको काफी कुछ जानकारी अब तक मिली होगी,

हिंदुत्व के वे अनुयायी बढ़ गए हैं जो ‘गद्दारों’ को गोली मारना चाहते हैं !

Why so much silence brother

नागरिकता के बारे में कितने स्पष्ट थे, भारत के संविधान निर्माता? How clear were the constitution makers of India about citizenship? [box type=”note” align=”” class=”” width=””] लोकतंत्र में राज्य और नागरिकों के बीच एक निर्णायक समझौता होता है (In democracy, there is a decisive agreement between the state and the citizens.) जिसके तहत जनता, वोट

यदि लोगों की नागरिकता संदिग्ध, तो मोदी सरकार भी अवैध : पराते

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If the citizenship of the people is doubtful, then Modi government is also illegal जगदलपुर, 11 जनवरी 2020। “यदि मोदी सरकार की नज़रों में देश के 130 करोड़ लोगों की नागरिकता संदिग्ध है, तो उनके वोटों से चुनी गई यह सरकार भी अवैध है और इसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है।”