दिल्ली दंगे में संघ की भूमिका और मीडिया की चुप्पी

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Sangh’s role in Delhi riots and media silence “भाई आरएसएस के लोग आये हैं यहां सपोर्ट में. ब्रिजपुरी में. और नौ मुल्लों को मार दिया गया है ब्रिजपुरी पुलिया पर हिम्मत बनाये रखो और इनकी बजाये रखो जय श्रीराम…” यह मैसेज दिल्ली दंगे के दौरान बने एक व्हाट्सऐप ग्रुप का है. दंगों में हुई आगजनी

दंगे देश की अर्थ व्यवस्था को पीछे ढकेलते हैं, दंगे मानवता के नाम पर कलंक हैं

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यह किसी से छिपा नहीं है कि देश कुछ दिनों से कमजोर उत्पादन, बेरोजगारी, आशंकित अर्थव्यवस्था के चलते चिंतित है। डॉलर की तुलना में रूपए का अवमूल्यन, महंगाई से आम लोग प्रभावित हैं। उधर कोरोना वायरस के कारण चीन से प्रतिबंधित हुए व्यापार के कारण देश के कारखानों में काम ठप्प है और इसका सीधा

जिन उस्मान सैफी ने बचाया मंदिर, “शाह” पुलिस ने दंगाई बता किया गिरफ्तार तो पुजारी ने रिहा करने के लिए दी अदालत में अर्ज़ी

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मुस्लिम बहुल मुस्तफाबाद के भीतर नेहरू विहार की गली नम्बर 18 (Street number 18 of Nehru Vihar within Muslim majority Mustafabad) में अधिकांश मुस्लिम के बीच रहने वाले 10 हिंदू परिवारों और उनके मंदिर की रात-रात भर जग कर रक्षा करने वाले 45 वर्षीय उस्मान सैफी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इलाक़े के

दंगा भड़काने में राजनीति का जितना हाथ है, उससे कम पत्रकारिता का नहीं, शुक्र है कि अब मैं पत्रकार नहीं हूं

dELHI dANGA pALASH bISWAS

Thankfully I am no longer a journalist 31 अक्टूबर 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी को गोली लगने पर पिताजी पुलिन बाबू अस्पताल में उन्हें देखने पहुंच गए थे। वे नारायणदत्त तिवारी के घर थे। तिवारीजी ही उन्हें अपने साथ अस्पताल से लाये थे। दिल्ली में रहकर उन्होंने भारत विभाजन का जख्म (Wound of partition of

दिल्ली में हालात नाजुक, अब तक दस मरे, दो आईपीएस सहित 186 लोग जख्मी

Breaking news

Situation critical in Delhi, ten people dead, 186 injured including two IPS नई दिल्ली, 25 फरवरी 2020.  उत्तरी-पूर्वी दिल्ली जिले में सीएए विरोधी और समर्थकों के बीच झड़प के बाद तीन दिन से जारी हिंसक घटनाओं में एक पुलिसकर्मी सहित अब तक 10 लोग मारे गए। दो आईपीएस अफसरों सहित 186 लोग जख्मी हो गए।