Dr. Kavita Arora

हाँ मैं बेशर्म हूँ….रवायतें ताक पर रख कर खुद अपनी राह चलती हूँ

हाँ मैं बेशर्म हूँ.... झुंड के साथ गोठ में शामिल नहीं होती रवायतें ताक पर… Read More

रात भर आज रात का जश्न चलेगा.. सुरूर भरी आँखों वाली शब जब देखेगी उजाला

उफ़्फ़ दिसम्बर की बहती नदी से बदन पर लोटे उड़ेलने की उलैहतें .. इकतीस है… Read More

बेड़ा गर्क है.. सस्ता नेटवर्क है.. इकोनॉमी पस्त है.. पर सब चंगा सी

रोज दिखती हैं मुझे अखबार सी शक्लें.... गली मुहल्ले चौराहों पर इश्तेहार सी शक्लें... शिकन… Read More

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