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रुद्र : पर मनोरंजन के नाम पर गाली गलौज कब तक!!

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रुद्र वेब सीरीज़ की समीक्षा | Rudra The Edge of Darkness Review in Hindi | Rudra Web Series Review रुद्र का फ़िल्म स्कोर सबसे बेहतरीन है जो पूरी वेब सीरीज़ में रोमांच जगाए रखता है और इसे देखने का मज़ा दोगुना भी करता है रुद्र वेब सीरीज़ की कहानी रुद्र वेब सीरीज़ की कहानी अंग्रेज़ी वेब सीरीज़ लूथर का रीमेक …

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कमजोर फ़िल्म ’36 फ़ार्म हाउस’ : हैरान नहीं परेशान करती है

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36 Farmhouse Movie Review, मूवी रिव्यू : 36 फार्महाउस किसी भी फ़िल्म को देखने से पहले आप क्या देखते हैं? उसकी कहानी? उसके एक्टर्स? उसमें उनकी की गई एक्टिंग? कोई जॉनर? डायरेक्टर? या कुछ और? सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर, गीत-संगीत, कैमरा आदि के बारे तो सामान्य दर्शक कहाँ देखते-सोचते हैं? 36 फ़ार्म हाउस की कहानी : कॉमेडी मिक्स मर्डर मिस्ट्री ’36 …

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सिनेमा के अर्थ को पूरा करती ‘चंडीगढ़ करे आशिक़ी’

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Chandigarh Kare Aashiqui Review in Hindi News about Chandigarh Kare Aashiqui : अपने अंजाम तक पहुंची है चंडीगढ़ करे आशिकी में लव स्टोरी अधिकतर बॉलीवुड फिल्मों की तरह Chandigarh Kare Aashiqui (चंडीगढ़ करे आशिकी) में भी एक लव स्टोरी शुरू हो अपने अंजाम तक पहुंची है, पर इस बीच का सफ़र बॉलीवुड की फिल्मों में न कभी देखा गया है …

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Special Ops 1.5 Review in Hindi : हनी ट्रैप और रॉ के इर्दगिर्द बुनी गई हिम्मत स्टोरी

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स्पेशल ऑप्स 1.5 रिव्यू हिंदी में द हिम्मत स्टोरी : नाम से ही कोई स्पेशल नहीं बन जाता शुरुआत से ही फ़िल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक किसी जासूसी फ़िल्म के लिए उपयुक्त लगता है और साथ में जिन कोणों का प्रयोग कर दृश्य दिखाए गए हैं वो लाजवाब हैं. युक्रेन की खूबसूरती पर आपका दिल आ जाएगा. Special Ops की सफलता …

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लंबी दूरी वाले रिश्तों की कहानी :बड़े काम कर गई ‘मीनाक्षी सुंदरेश्वर’

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फिल्म रिव्यू : मीनाक्षी सुंदरेश्वर | Movie Review: Meenakshi Sundareshwar | Meenakshi Sundareshwar movie Netflix लीक से हटकर लिए गए डिजिटल इंडिया के लंबी दूरी वाले रिश्तों long distance relationship विषय पर बनी इस हल्की-फुल्की कॉमेडी फ़िल्म में महफ़िल लूट ले गई हैं सान्या मल्होत्रा. शुरुआत या अंत में आने वाली इंट्रो लाइनों के माध्यम से बहुत कम फिल्में कुछ …

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एंटरटेनमेंट बोले तो ‘सूर्यवंशी’ बाकी खोखली

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सूर्यवंशी रिव्यू : Sooryavanshi Movie Review in Hindi कोरोना के बाद थियेटर रिलीज में 100 करोड़ क्लब पार करने वाली पहली फ़िल्म बनी सूर्यवंशी Sooryavanshi (सूर्यवंशी) फ़िल्म दिवाली के एक दिन बाद सिनेमाघरों में रिलीज हुई और अब कोरोना के बाद जब लगभग सभी जगह 100 फीसदी क्षमता के साथ थिएटर्स खुल चुके हैं। तो सूर्यवंशी कोरोना के बाद थियेटर …

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‘जय भीम’ देखने के बाद चंद्रु हर राज्य में पैदा होगा!

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Case of beating a Dalit youth tied to a tree on the charge of stealing a goat ‘जय भीम’ फिल्म समीक्षा | फिल्म रिव्यू: जय भीम | Jai Bhim movie review Jai Bhim Review in Hindi by Himanshu Joshi राजस्थान के भीलवाड़ा के एक गांव में बकरी चोरी करने के आरोप में दलित युवक को पेड़ से बांधकर पीटने का …

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भाई ये कैसी पिच्छर बनाई ‘भवाई’ : ‘इस युग में सभी रावण हैं।’

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Bhavai (रावण लीला) Bhavai Movie Review in Hindi | भवाई मूवी रिव्यू हिंदी में राम-रावण की कहानी : नए जमाने की लव स्टोरी एक बाप जिसने अपने बेटे का नाम रखा राजा राम। गुजरात का एक गांव खाखर जहां कभी रामलीला नहीं हुई। अब जब पहली बार हुई तो उसमें राम, सीता का कैरेक्टर निभाने वाले कलाकारों को ही गांव …

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जानिए ‘जय भीम’ क्यों देखें! पूरी फिल्म इतनी लाउड और नाटकीय होने के बावजूद आपको छू क्यों नहीं पाती?

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‘जय भीम’ फिल्म समीक्षा | फिल्म रिव्यू: जय भीम | Jai Bhim movie review Jai Bhim Review in Hindi by Abhishek Srivastava शुरुआती आधे घंटे की जबरदस्त चटान के बाद किसी तरह लय बनी, तक जाकर ‘जय भीम’ निपटी। इस बीच बार-बार गोविंद निहलानी के किरदार (Characters of Govind Nihalani) भीखू लहानिया, भास्कर कुलकर्णी, दुशाने, भोंसले, डॉक्टर पाटील आदि याद …

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“सर”- वर्ग विभाजन के साये में पनपी एक खूबसूरत प्रेम कहानी

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वर्ग विभाजन के साये में एक नाजुक प्रेम कहानी को पेश करती है “सर” “सर” फिल्म की समीक्षा (“Sir” movie review) वर्ग विभाजन के विषय पर आधारित फ़िल्में (films on class division) हमेशा से ही भारतीय सिनेमा का एक प्रमुख आकर्षण रही हैं जिसमें एक अमीर और एक गरीब का प्रेमी जोड़ा अपने वर्गीय दायरे को पीछे छोड़ते हुए प्यार …

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दरारें : प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आएगा जिन्हें ज़िंदगी ने बनिया बना दिया

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धूल, धुआं, धूसरित करती ‘दरारें‘ हरियाणवी फिल्म ‘दरारें‘ की समीक्षा | विजेता दहिया की फिल्म ‘दरारें’ को लेकर आपकी क्या समीक्षा है? ‘प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आएगा जिन्हें ज़िंदगी ने बनिया बना दिया।‘ पंजाबी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि की लिखी इन पंक्तियों के साथ शुरू होने वाली ताजा तरीन एम एक्स प्लेयर पर रिलीज़ हुई हरियाणवी फिल्म …

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ओटीटी को ‘बड़ा पर्दा’ बनता देखने की कहानी है ‘शेरनी’

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‘शेरनी’ की फिल्म समीक्षा | Sherni movie review in Hindi अमित मसूरकर यानि नई पीढ़ी का सफलतम निर्देशक चालीस की उम्र में आप किसी को बूढ़ा नहीं कह सकते तो युवा भी नहीं, इंसान की समझदारी अपने पूर्व अनुभवों से उस समय शीर्ष पर होती है। वही समझदारी अमित मसूरकर ने ‘शेरनी’ बनाते हुए दिखाई है, जिस वज़ह से यह …

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इंसानी मन की दमित इच्छाओं का ‘आखेट’

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‘आखेट’ फ़िल्म समीक्षा | ‘Aakhet’ film review फ़िल्म के पटकथा लेखक, निर्देशक रवि बुले यूँ तो पेशे से फ़िल्म समीक्षक है लेकिन पहली बार ‘आखेट’ फ़िल्म से उन्होंने फिल्म निर्देशक के रूप में डेब्यू किया है। ‘आखेट’ फ़िल्म की कहानी कुणाल सिंह की लिखी कहानी ‘आखेटक’ पर आधारित है। फ़िल्म जंगलों से खत्म हो रहे बाघों पर बात करती है। …

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न झुकने और न रुकने की बात ‘नूर’ में

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फ़िल्म रिव्यू – न झुकने और न रुकने की बात ‘नूर‘ में फ़िल्म – नूर निर्देशक – विकास विक स्टार कास्ट – वेदांत, जसपाल शर्मा, सुनील चितकारा, शिव कुमार आदि रिलीजिंग प्लेटफॉर्म – डिज़्नी हॉट स्टार प्लस अपनी रेटिंग – 3.5 स्टार पिता जी भूख लगी है। ले बेटा गोली खा। हा… हा…हा… ये फ़िल्म के किसी के डायलॉग नहीं …

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सपनों की तलाश में ‘पीली मछली’

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फ़िल्म रिव्यू – ‘पीली मछली’ Film Review -PEELI MACHLI कलाकार, अपनी कहानी का हीरो, धुआँ और राख ये तीन सेगमेंट है पिछले हफ़्ते जी5 एप्प पर रिलीज़ हुई फ़िल्म पीली मछली के। फ़िल्म की कहानी में एक अकेला पिता है उसका छोटा सा बेटा है। बेटा स्कूल में पढ़ रहा है और पिता लिखता है, साथ ही अपनी फिल्म को …

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गंदगी मचाती एनसीआर चैप्टर वन

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NCR Chapter One: Film review कोई भी खेल को जीतने के लिए दो चीजें का होना जरूरी है। पहली तैयारी और दूसरी किस्मत। जब तैयारी और किस्मत  दोनों ही साथ ना दे तो एक ही रास्ता रह जाता है बेईमानी। निर्देशक सैफ़ बैद्य की हालिया रिलीज़ फ़िल्म एनसीआर चैप्टर वन की शुरुआत इसी संवाद से होती है। लेकिन निर्देशक खुद …

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अंधेरे खंडहरों में बिलबिलाती जिंदगियां ¬गुलाबो सिताबो पर क्षण भर

Man’s physical impoverishment also causes his mental impoverishment. गुलाबो सिताबो हिंदी फिल्म की समीक्षा | Gulabo sitabo hindi movie review  आदमी की भौतिक दरिद्रता उसकी मानसिक दरिद्रता का भी कारण बनती है। वह अपने अस्तित्व के लिये ही हर प्रकार की लूट-खसोट, कमीनेपन की मानसिकता का शिकार होता है, छोटी-छोटी चालाकियों में ही पूरा जीवन व्यतीत कर देता है। ‘गुलाबो सिताबो’ …

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