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Tag Archives: Forest society

राजा ज्ञानी था, उसने कहा- “प्रकाश हो”! अब प्रजा बत्ती बनाएगी, माचिस सुलगाएगी

Corona virus

इंसान के मनोभावों (Human emotions) में भय सबसे आदिम प्रवृत्ति है। इसी भय ने हमें गढ़ा है। सदियों के विकासक्रम में इकलौता भय ही है, जो अब तक बना हुआ है। मन के गहरे तहखानों में, दीवारों से चिपटा। काई की तरह, हरा, ताज़ा, लेकिन आदिम। जब मनुष्य अपने विकासक्रम में छोटा हुआ करता था, उसे तमाम भय थे। जानवरों …

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