मधुमेह और हृदय रोगों से बचा सकता है सकता है स्वस्थ लिवर

नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर ऐंड बायलरी साइंसेज के निदेशक प्रोफेसर शिव कुमार सरीन (Professor Shiv Kumar Sarin, Director, Institute of Liver and Biliary Sciences, New Delhi)

एक सामान्य लिवर में एक निश्चित मात्रा में फैट जरूर होता है। पर, कई बार लिवर की कोशिकाओं में अनावश्यक फैट की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्थिति फैटी लिवर (fatty liver in Hindi) कहलाती है, जो एक गंभीर रोग है।

लिवर संबंधी बीमारियों और फैटी लिवर के हानिकारक प्रभाव : जागरुकता आवश्यक

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फैटी लिवर के कई संकेत होते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि वे सभी एक-साथ नजर आएं। ये लक्षण बाद के चरणों में नजर आ सकते हैं जैसे कि थकान, कमजोरी, हल्का दर्द या पेट के निचने हिस्से के दाहिने या बीच में भारीपन, लिवर एंजाइम्स का उच्च स्तर, इंसुलिन का स्तर बढ़ना, ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ना, भूख में कमी, मतली और उल्टी आदि।