महात्मा गाँधी को प्रतीकात्मक ही नहीं बल्कि धरातल पर उतारना है ज़रूरी : मेधा पाटकर

Medha Patkar and Dr Sandeep Pandey

गाँधीवादी अर्थव्यवस्था ही सही मायने में समाजवादी, सतत, और न्यायपरस्त अर्थव्यवस्था है. उदाहरण के रूप में यदि रोज़गार की चुनौती हल करनी है तो वह बड़े पैमाने के उत्पादन से नहीं होगी बल्कि जनता द्वारा उत्पादन से होगी.

हमारे जीवन, जीवनशैली और रोज़गार से कम-से-कम संसाधनों का दोहन हो

Medha Patkar

हमारे जीवन, जीवनशैली और रोज़गार से कम-से-कम संसाधनों का दोहन हो – सबके सतत विकास के लिए यह है ज़रूरी – मेधा पाटकर Exploit the least resources from our life, lifestyle and employment – It is necessary for the sustainable development of all – Medha Patkar नई दिल्ली, 25 जुलाई 2020. ग्रेटा थुनबर्ग से प्रेरित हो कर