रवीश कुमार युनिवर्सिटी के छात्र “मीडिया बिकाऊ है”, यह चालू धारणा दिमाग से निकाल दें!

Ravish Kumar

मीडिया के विषय में आम धारणा (General perception about media) है कि यह बिकी हुई. अब तो लोग मेन स्ट्रीम मीडिया (Main stream media) को गोदी मीडिया भी कहने लगे हैं. लेकिन ऐसा आरोप लगाना क्या उचित है? काबिले गौर है कि विचारों का निर्माण करने वाली मीडिया में सक्रिय लोग काफी पढ़े – लिखे

अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें, वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है

Donald Trump

Compare your situation with the situation in America, what is happening there is happening exactly in India. अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें। वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है। सिर्फ मृतकों की संख्या वहां 81 हजार पार है। बेरोज़गार दस करोड़। हमारे यहां आंकड़े सच बोल

क्या पत्रकारिता करने के लिये हमें इस स्तर तक गिरना होगा !

Desh ka dushman media

मीडिया की गिरती साख दोषी कौन, कैसे बनी रहे मीडिया की विश्वसनीयता आज सुबह आंख खुलते ही दो पत्रकार साथियों के द्वारा भेजे गये मैसेज को पढ़ता हूँ। पहला संदेश देवघर जिला के मधुपुर के पत्रकारों (Journalists of Madhupur in Deoghar district) का होता है जिसमें दो पत्रकारों के ऊपर मधुपुर थाना में FIR दर्ज

जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया