रात भर आज रात का जश्न चलेगा.. सुरूर भरी आँखों वाली शब जब देखेगी उजाला

Welcome New Year 2020

उफ़्फ़ दिसम्बर की बहती नदी से बदन पर लोटे उड़ेलने की उलैहतें .. इकतीस है हर साल की तरह फिर रीस है .. घाट पर ख़ाली होगा ग्यारह माह के कबाड़ का झोला .. साल फिर उतार फेंकेगा पुराने साल का चोला .. जश्न के वास्ते सब घरों से छूट भागेंगे .. रात के पहर