मजदूरों की वर्तमान दुर्दशा के लिए सरकारों और उद्योगपतियों का गठजोड़ जिम्मेदार

Modi with Ambani Tata

सरकार की प्राथमिकताओं मजदूर कहीं है ही नहीं The nexus of governments and industrialists responsible for the present plight of workers The government’s priorities are not workers anywhere मजदूरों का सब्र का बाँध अब टूट चुका है। कई राज्यों से मजदूर पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े हैं। रास्ते में जगह जगह उन्हें

अमीर भारत की सत्ता पर कब्ज़ा करने और बनाए रखने की लड़ाई सस्ती नहीं हो सकती

How many countries will settle in one country

कोरोना महामारी : प्रतिक्रांति की गहरी नींव  : Corona Epidemic: Deep Foundations of Counter-Revolution भारत में बीसवीं सदी का अंतिम दशक ख़त्म होते-होते समस्त मुख्यधारा राजनीतिक पार्टियों, मंचों और माध्यमों से गरीबी की चर्चा समाप्त हो गई. देश की शासक जमात के बीच यह तय माना गया कि अब देश में गरीबी नहीं रही/नहीं रहेगी. जो