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Tag Archives: Poem on migration

पलायन – एक नयी पोथेर पाँचाली

How many countries will settle in one country

नदी में कटान बाढ़ में उफान डूब गया धान भारी है लगान आए रहे छोर के गाम सुना सहर में मिलबे करेगा काम दिहाड़ी-मज़ूरी का कुछ होगा इन्तेजाम कोई बोला खोले लो पान-बीड़ी का दुकान कोई बोला उहाँ चलो बन रहा बड़का मकान माल ढोने-ऊने का काम सौ रुपया दिन का दू पैकेट बिस्कुट और चा सुबो साम सरदार कहे …

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