क्या मोतीलाल बास्के के परिवार वालों को इंसाफ मिलेगा ?

BABULAL Marandi Will Motilal Baske's family get justice

Will Motilal Baske’s family get justice? Doli laborer Motilal Baske killed by police as Maoist राँची से विशद कुमार 29 दिसंबर को हेमंत सरकार का गठन होने जा रहा है। शायद झारखंडी जनता ने पिछली सरकार से आजीज होकर महागठबंधन को बहुमत दिया है। देखना यह है कि हेमंत सरकार जनता की अपेक्षाओं पर कितनी खरा उतरती है? जिसमें जनता की कई अपेक्षाएं शामिल है। जिसमें डोली मजदूर मोतीलाल बास्के की माओवादी बताकर पुलिस द्वारा की गई हत्या भी शामिल है। क्या मोतीलाल बास्के के परिवार वालों को इंसाफ मिल सकता है? वहीं मोतीलाल बास्के की मौत को लेकर किए गए जनआंदोलनों के कारण प्रतिबंधित किए गए ‘मजदूर संगठन समिति’ से भी प्रतिबंधित हटाया जा सकता है? रघुवर सरकार के कार्यकाल में हुए तमाम तरह की अलोकतांत्रिक व गैर-संवैधानिक घोषणाओं को वापस लिया जा सकता है? झारखंडी जनता को नई सरकार से बहुत सारी अपेक्षाए हैं, जिसे हेमंत किस स्तर से पूरा करते हैं, देखना होगा। 9 जून 2017 शाम को गिरिडीह पुलिस (Giridih Police) ने नक्सल उन्मूलन अभियान (Naxalite eradication campaign) के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करने का प्रेस बयान सहित एक फोटो जारी कर बताया था कि ढोलकट्टा के जंगल में पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक दुर्दांत नक्सली मारा गया है, जिसके पास से एसएलआर रायफल एवं कई प्रतिबंधित सामान बरामद हुए हैं। दूसरे दिन 10 जून झारखंड के तत्कालीन डीजीपी डीके पांडेय मधुबन आए और गिरिडीह पुलिस को 15 लाख रू0 का इनाम सहित एक लाख रू0 जश्न मनाने के लिए दिया। वहीं सीआरपीएफ को 11 लाख रू0 इनाम की राशि दी गई। मगर 10 जून शाम होते ही पुलिस की खुशी पर मानो ग्रहण लग गया, क्योंकि क्षेत्र का मजदूर संगठन समिति और मरांग बुरू सांवता सुसार बैसी ने पुलिस के दावे को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि नक्सल के नाम पर जिसे पुलिस ने मारा है वह एक आदिवासी डोली मजदूर मोतीलाल बास्के था। वह दोनों संगठनों का सदस्य था, उसकी मसंस की सदस्यता संख्या जहां 2065 है, वहीं सुसार बैसी की सदस्यता संख्या 70 है। इस खबर के प्रचारित होते ही पुलिस की आलोचना शुरू हो गई, मगर सफाई में पुलिस ने कोई बयान नहीं दिया। मोतीलाल का नक्सली नहीं होने के कई प्रमाण इन संगठनों द्वारा दिए गए। वहीं पुलिस उसके नक्सली होने का कोई भी प्रमाण नहीं दे सकी। नतिजा यह रहा कि 14 जून को मसंस, सांवता सुसार बैसी, झामुमो, जेवीएम, भाकपा माले सहित क्षेत्र के कई पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा 14 जून को महापंचायत बुलाई गई जिसमें लगभग 5 हजार की भीड़ जमा हो गई। इसी दिन एक रैली हुई और मृतक की पत्नी पार्वती देवी द्वारा मधुबन थाना में पुलिस के खिलाफ अपने पति की हत्या का मामला दर्ज कराया गया। मोतीलाल की इस हत्या पर मधुबन के व्यवसायी वर्ग भी भौचक था। उसके नक्सली होने की बात किसी के गले नहीं उतर रही थी। पारसनाथ पहाड़ के दूसरी छोर में अवस्थित ढोलकट्टा गांव में घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ था। कई लोग गांव छोड़ कर अपने अपने रिश्तेदारों के यहां भाग गये थे। मृतक की पत्नी पावर्ती ने बताया था कि उसके पति रोज प्रातः तीन बजे शिखर पर जाते थे और 11 बजे के करीब लौटते थे। क्योंकि ऊपर एक छोटी सी दुकान है जहां वे नींबू पानी व चाय वगैरह बेचते थे। कभी-कभी डोली भी ले जाते थे। मगर उस दिन गये तो देर शाम तक नहीं लौटे । शाम को गांव वालों से पता चला कि पुलिस ने उसे गोली मार दी है। मृतक के तीन बच्चे हैं, बड़ा बेटा निर्मल बास्के उस वक्त आठवीं में पढ़ता था, वहीं राम बास्के व लखन बास्के जो जुड़वा हैं, दूसरी कक्षा में पढ़ते थे। मोतीलाल ससुराल में रहता था, तथा वहीं बगल की जमीन पर उसे इंदिरा आवास योजना के तहत मकान बनाने का सरकारी पैसा मिला था। वह पहली किस्त से नींव से ऊपर तक की जुड़ाई कर चुका था। उल्लेखनीय है कि कोई भी सरकारी योजना के लाभुक का चयन किसी भी अपराधी व्यक्ति का नहीं होता है। पुलिस की गोली का शिकार मोतीलाल