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Tag Archives: Shayari

मैं रोटी और कपड़ों में उलझा रहा, और एक फरेबी ने मेरा वतन बेच डाला.

Rukhsar Shayari in Hindi

Rukhsar Shayari in Hindi सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने निम्न नज़्म उपलब्ध कराई है। यह नज़्म आज के दौर में भी मौजूँ है। शायर का नाम अज्ञात है। ऐ वतन कैसे ये धब्बे दर-ओ-दीवार पर हैं ? किस साकी के ये तमाचे तेरे रुखसार पर हैं ? ए वतन तेरा ये उतरा हुआ चेहरा क्यूँ है …

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