बंद करो बकवास..,,, बातों से भूख शांत होती नहीं है।

मज़दूर दिवस  पर सभी मज़दूरों को समर्पित एक रचना। A poem dedicated to all workers on Labor Day बंद करो बकवास, श्रम से चूता पसीना,

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