बड़ी बासी सी लगती है जब नज़्म मेरी ज़िंदा सवाल ढोती है… घर वापसी मजदूर की है ना कि राजा राम की

Migrants

मैं किसी को कोसना नहीं चाहती.. देश- विदेश की मौजूदा अवस्था.. क्या क्यूँ किस तरह चल रही है व्यवस्था.. सत्ता वत्ता..आस्था वास्था.. सब पर बहस बेकार है.. हमने वोट दे दिया बस अब सब कामों पर सरकार है… हमें उनके किये को ही बढ़-बढ़ कर हांकना है.. अगले आदेश तलक चुप रहकर फ़क़त मुँह ही