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Tag Archives: wolf in poetry

भेड़िया अब दो पैरों पर चल सकता है/ दे सकता है सत्संग शिविर में प्रवचन

नित्यानन्द गायेन Nityanand Gayen

चुप्पी साधे सब जीव सुरक्षित हो जाने के भ्रम में अंधेरे बिलों में छिप कर राहत की सांस ले रहे हैं   बाहर आदमखोर भेड़िया हंस रहा है इसकी ख़बर नहीं है उन्हें   भेड़िया अब दो पैरों पर चल सकता है दे सकता है सत्संग शिविर में प्रवचन सुना सकता है बच्चों को कहानी शिकार को जाल में फंसाने …

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